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तो आखिर क्यों आकाश मिसाईल हो गई है ब्रह्मोस मिसाईल से भी बेहतर?

      डीआरडीओ के वैज्ञानिक मानते हैं कि आकाश मिसाइल एक्सपोर्ट के मामले में भारत के ब्रह्मोस और अन्य सभी मिसाइलों से काफी आगे निकल गए हैं।

      DRDO द्वारा विकसित, आकाश मिसाइल सिस्टम की रेंज 25 किमी है और यह फाइटर एयरक्राफ्ट, क्रूज मिसाइलों, ड्रोन और अन्य एरियल टारगेट्स को निशाना बनाने में सक्षम है। इस मिसाइल को 2014 में भारतीय वायु सेना में और 2015 में भारतीय सेना में शामिल किया गया था। भारत की घरेलू मिसाइल सिस्टम का सबसे बड़ा फायदा यह है कि यह सतह से हवा में मार करने वाली मिसाइल (यानि सर्फेस टू एयर SAM) जो एक खास ऊंचाई और वातावरण में काम करते हैं, इनके उलट आकाश मिसाइल सभी जगहों पर काम कर करते हैं।

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      मेक इन इंडिया पहल के लिए एक मील का पत्थर हासिल करते हुए नरेंद्र मोदी सरकार ने 30 दिसंबर को अपने आकाश एयर डिफेंस सिस्टम के निर्यात की मंजूरी दे दी है। इसके अलावा भविष्य में इसके लिए तेजी से मंजूरी के लिए एक कमिटी का गठन किया गया है। भारतीय शस्त्र बलों में शामिल होने के बाद, इंटरनेशनल एक्स्ज़ीबीसन / डिफेन्स एक्सपो / एरो इंडिया के दौरान कई मित्र देशों ने आकाश मिसाइल में दिलचस्पी दिखाई है। अब भारत सरकार की मंजूरी से भारतीय निर्माताओं को विभिन्न देशों द्वारा जारी RFI / RFP यानि खरीदारी की प्रक्रिया में भाग लेने की सुविधा मिलेगी।

      आकाश मिसाइल सिस्टम के अलावा कई देशों ने कई बड़े प्लेटफॉर्म्स जैसे कोस्टल सर्विलांस सिस्टम, रडार और एयर प्लेटफॉर्म में दिलचस्पी दिखाई है। मीडिया रिपोर्टों से पता चलता है कि वियतनाम और संयुक्त अरब अमीरात सहित कई मित्र देशों ने सर्फेस टू एयर मिसाइल सिस्टम को खरीदने में दिलचस्पी दिखा रहे हैं। यूएई के पास दुनिया की सबसे एडवांस्ड एयर डिफेन्स सिस्टम मौजूद है, जिसमें मीडियम रेंज में रूसी पन्तशिर-S1 सिस्टम के साथ साथ अमेरिकी पैट्रियॉट सिस्टम बैटरियाँ शामिल हैं। इसके अलावा यूएई ने दो अमेरिकी टर्मिनल हाई एल्टीट्यूड एरिया डिफेंस सिस्टम – Terminal High Altitude Area Defence System (THAAD) को भी तैनात किया हुआ है, जोकि इंटर-कॉन्टिनेंटल बैलिस्टिक मिसाइलों को निशाना बनाने में सक्षम हैं।

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      अमेरिका स्थित मिसाइल डिफेंस एडवोकेसी एलायंस का हवाला देते हुए अल अरबिया इंग्लिश ने कहा है कि संयुक्त अरब अमीरात के पास खाड़ी क्षेत्रों में सबसे एडवांस्ड मिसाइल डिफेन्स सिस्टम है और यूएई अमरीका के बाहर अकेला ऐसा देश है, जिसनें THAAD बैटरी को तैनात किया हुआ है और वह गल्फ कॉपरेशन काउंसिल (GCC) का पहला गल्फ देश है, जिसने पेट्रियॉट PAC-3 को तैनात किया हुआ है।

      आकाश मिसाइलों में ऐसा क्या खास है?

      जहाँ वियतनाम आकाश मिसाइलों का पहला विदेशी ग्राहक हो सकता है, वहीं क्या यूएई अभी भी भारतीय मिसाइल सिस्टम को खरीदने में दिलचस्पी लेगा, यह देखते हुए कि उसके पास पहले से ही इससे भी ज्यादा खतरनाक हथियार हैं?

      आकाश जिस तरह की बहुमुखी प्रतिभा प्रदान करता है वह दूसरी अन्य सिस्टम पर इसको लाभ देता है।

      निर्यात करने के अलावा भी इस सिस्टम में बहुत क्षमता मौजूद है। उदाहारण के तौर पर सप्लाई लाइनों में स्थिरता। 1965 में जब भारत युद्ध में गया था, और कारगिल युद्ध और दूसरी अन्य जंगों के दौरान आयात किए गए हथियारों को बहुत ज्यादा कीमतों में खरीदा गया था। जिससे भारत को बहुत मुश्किलें झेलनी पड़ी थी। युद्ध के समय सभी देश स्पेयर पार्ट्स और गोला बारूद की सप्लाई को रोकने जैसी समस्याएं पैदा करने लगे थे। भारत हथियारों का एक बड़ा आयातक देश रहा है, जो युद्ध के मैदान पर नुकसानदेह साबित हुआ है। अगर हथियार समान देश से खरीदे गए हैं, तो देशों को अपने दुश्मन देश के खिलाफ आयात किये गये सिस्टम को इस्तेमाल करने की अनुमति नहीं है।

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      बालाकोट के बाद जो हुआ उसे देखिए। भारत ने अपने पुराने मिग-21 फाइटर जेट का इस्तेमाल करते हुए लॉकहीड मार्टिन के एफ-16 फाइटर जेट को मार गिराया, जिसके बाद कंपनी ने इसको नहीं माना। क्योंकि यह लॉकहीड मार्टिन के लिए एक बड़ा कमर्शियल सेटबैक था। अगर हम डिफेन्स सिस्टम्स का आयात करते रहे तो यह जानबूझकर और अपनी मर्ज़ी से खुदखुशी करने जैसा होगा। एक सिस्टम को खरीदने का मकसद युद्ध की स्थिति में देश की रक्षा करना है और देश को इसके इस्तेमाल की छूट होनी चाहिए, जिस तरह से वो चाहता हो, बिना रोक टोक के।

      ऐसे में भारत को एक रक्षा संबंधी निर्यातक के रूप में क्या चीज़ उसे दुनिया से अलग करती है?

      जो बात भारत को सभी देशों से अलग करती है, वो है खुद भारत, जिसकी विश्वशनियता दुनिया भर में मशहूर है। यही वजह है भारत की व्यापार नीति भी दुनिया भर में प्रसिद्ध है।

      भारत के पास रक्षा संबंधी निर्यात में बहुत उज्ज्वल भविष्य है। कम श्रम लागत और संसाधनों की भरमार के अलावा एक और बात जो भारत को सबसे अलग करती है, वो है जलवायु, तापमान और टोपोलॉजी यानि जगहों की विविधता। जो दुनिया में युद्ध क्षेत्रों की सभी स्थितियों को कवर करते हैं। भारत में युद्ध क्षेत्र की स्थिति कहीं अधिक विविध और मुश्किल है। जिसमें राजस्थान की 50 डिग्री की गर्मी से लेकर सियाचिन की -50 डिग्री की जमा देने वाली बैटल फील्ड शामिल हैं।

      रक्षा बाजार में दूसरी मिसाइल सिस्टमों की तुलना में आकाश की क्षमताएं कहीं ज्यादा हैं, भारत ने इसको स्क्रैच से तैयार किया है। बिना किसी की मदद के, सिर्फ मिसाइल ही नहीं, कमांड कंट्रोल सिस्टम, सॉफ्टवेयर, लॉजिस्टिक्स सहित पूरी की पूरी एयरडिफेन्स सिस्टम स्वदेशी है, भारत में ही बनायी गयी है। यह भारत को खरीदार की जरूरतों और लागत के अनुसार प्रभावी लागत तरीके से इसे फाइन ट्यून करने की क्षमता देता है।

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      सतह से हवा में मार करने वाली अन्य मिसाइलों (SAM सिस्टम) के उलट जो केवल खास ऊंचाई और वातावरण में काम करती है, आकाश का सबसे बड़ा फायदा यह है कि यह "सभी तरह के वातावरण और जगहों" पर काम कर सकता है। उदाहरण के लिए, अगर अर्जुन टैंक को निर्यात करने की आवश्यकता है, तो उन्हें थार रेगिस्तान में और साथ ही ऊंचाई वाली ठंडी इलाकों में भी टेस्ट किया जा चुका है। ठीक वैसे ही आकाश को भी हर मौसम और हर माहौल में टेस्ट किया गया है।

      प्रत्येक देश जिसने हवा से हवा में मार करने वाली मिसाइल सिस्टम को बनाया किया है, उन्होंने इसे अपनी जरूरतों और अपने देश की के मौसम और इलाके के अनुसार डिजाइन किया है। यही वजह है आकाश इन सब में खास है, और अलग है। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने बुधवार को घोषणा की कि 96% स्वदेशी उपकरणों के साथ शॉर्ट-रेंज, सतह से हवा में मार करने वाली आकाश मिसाइलों का एक्सपोर्ट वर्जन भारतीय सेना की मौजूदा सभी मिसाइल सिस्टम से अलग हैं।

      अपने प्रतिद्वंद्वियों की तुलना में भारत के आकाश और अन्य डिफेन्स एक्सपोर्ट सिस्टम इन चार मामलों में सबसे अलग हैं:

      1. आकाश मिसाइल सिस्टम को विभिन्न परिस्थितियों के लिए बनाया गया गया है जो दुनिया में कहीं भी, किसी भी तरह की स्थिति का सामना कर सकती हैं जो उन्हें "सबसे विश्वसनीय और मजबूत" बनाती है।

      2. दूसरी यह सिस्टम पूरी तरह से स्वदेशी है, इसलिए भारत में खरीदार की जरूरतों के अनुसार इसको प्रभावी लागत के तरीके से ढाला जा सकता है, जो इसको अपने दुश्मन के खिलाफ ज्यादा लाभ देते हैं।

      3. तीसरा भारत को आम तौर पर एक भरोसेमंद साझेदार, नैतिकता और कमिटमेंट वाला निर्यातक देश माना जाता है।

      4. चौथा भारत दूसरे देशों के आंतरिक मामलों में हस्तक्षेप करने की कोशिश नहीं करता है, जो कई अन्य देश करते हैं जब वे अपनी रक्षा सौदों को बेचते हैं। ऐसे कई देश हैं जो अपने डिफेन्स सिस्टम को कई प्रतिबंधों के साथ बेचते हैं। वहीँ भारत ऐसी किसी भी अनैतिक प्रतिबंध पर जोर नहीं करता है। जब तक वह हम पर हमला नहीं करते, तब तक वो अपनी जरूरतों के अनुसार सिस्टम का उपयोग करने के लिए स्वतंत्र हैं।

      ये चीजें भारतीय डिफेन्स एक्सपोर्ट को दुनिया में सबसे खास बनाती हैं।

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