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20 लाख करोड़ के कोविड 19 आर्थिक राहत पैकेज का पूरा विभाजिकरण ।

       प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी ने कोविड 19 से लड़ने और इस विपत्ति को अवसर के रूप में भुनाने के लिए आत्मनिर्भर भारत अभियान आह्वान एवं 20 लाख करोड़ आर्थिक राहत पैकेज के पश्चात वित्त मंत्री को इस पैकेज के विभिन्न वर्गों एवं क्षेत्रों में बांटे जाने का विस्तृत ब्यौरा देना था । जिसके पहले चरण में बुधवार को दिनांक 13.05.2020 को MSMEs क्षेत्र सबसे अधिक केंद्रित रहा । यह याद रहे कि इससे पहले श्री नितिन गडकरी, सूक्षम, लघु एवं मध्यम उद्योग मंत्री ने MSMEs क्षेत्र में आने वाले कामों की परिभाषा में बदलाव किया था । इस ब्यौरे की पाँचवी किस्त रविवार दिनांक 17.05.2020 को देश के सामने रखी ।

                 (Check video on this topic: https://www.youtube.com/watch?v=LoONQ05LNGE&t=74s)

      पहली किस्त में वित्त मंत्री श्रीमती निर्मला सीतारमण ने करीब 5 लाख 94 हजार 550 रुपये की सहायता का घोषणा की । इसमें MSMEs क्षेत्र को तीन लाख करोड़ रुपये बिना किसी गारंटी के आसान लोन के रूप में देने की घोषणा की । सरकारी कर्मचारियों एवं कारोबारियों की सहायता के लिए EPF अंशदान के 2800 करोड़ रुपये की सहायता का घोषणा हुई । EPF अंशदान में कटौती से 6750 करोड़ रुपये की लिक्विडिटी बढ़ेगी । NBFC/HFC/MFI के लिए 30 हजार करोड़ रुपये की लिक्विडिटी का प्रावधान किया गया । TDS/TCS में 50 हजार रुपये की कटौती की गई ।

      दूसरी किस्त जोकि गुरूवार के दिन दिनांक 15.05.2020 को घोषित हुई में कुल 3.10 लाख करोड़ रुपये का ब्यौरा दिया । वित्त मंत्री ने मुद्रा शिशु लोन योजना के तहत 1500 करोड़ रुपये की ब्याज राहत की घोषणा की । 8 हजार करोड़ प्रवासी मजदूरों के लिए 2 माह के राशन के लिए 3500 करोड़ रुपये देने की घोषणा हुई । फेरीवालों के लिए दस हजार रुपये तक कर्ज योजना की घोषणा हुई एवं 5000 करोड़ रुपये का प्रावधान हुआ । हाउसिंग स्कीम के द्वारा 70 हजार करोड़ रुपये की सब्सिडी, नाबार्ड के द्वारा 30 हजार करोड़ रुपये की अतिरिक्त सहायता और केसीसी के द्वारा 2 लाख करोड़ रुपये अतिरिक्त ऋण किसानों के लिए घोषित हुए ।

      दिनांक 15.05.2020 को शुक्रवार के दिन तीसरी किस्त में कुल 1.50 लाख करोड़ रुपये भिन्न – भिन्न क्षेत्रों के लिए राहत एवं व्यवसायों में घोषित हुए । फूड माइक्रो एंटरप्राइजेज के लिए 10 हजार करोड़ रुपये का प्रावधान सरकार द्वारा किया गया । प्रधानमंत्री मतस्य संपदा योजना में 20 हजार करोड़ रुपये का आवंटन किया गया । साथ ही टॉप टू टोटल के लिए 500 करोड़ रुपये कृषि इन्फ्रास्ट्रक्चर पर 1 लाख करोड़ रुपये निवेश का ऐलान किया गया । पशुपालन के लिए ढांचागत विकास पर 15 हजार करोड़ रुपये खर्च की बात भी वित्त मंत्री द्वारा रखी गई । हर्बल खेती के लिए भी 4 हजार करोड़ रुपये दिए गए है ।

      शनिवार दिनांक 16.05.2020 को चौथी किस्त में वित्त मंत्री ने 8000 हजार करोड़ रुपये वायबिलिटी फंड का घोषणा की तथा कई बड़े - बड़े आधारभूत सुधारों का ऐलान भी इसमें किया गया है ।

      रविवार दिनांक 17.05.2020 के दिन पाँचवी एवं आखिरी किस्त में वित्त मंत्री श्रीमती निर्मला सीतारमण द्वारा 40 हजार करोड़ रुपये मनरेगा के लिए आवंटित किए गए । उन्होंने कहा कि रिजर्व बैंक ने भी 9 लाख करोड़ रुपये से अधिक की लिक्विडिटी उपायों की घोषणा हुई है, जिसका वास्तविक प्रभाव 8 लाख करोड़ रुपये से अधिक है ।

      उपरोक्त सभी 20 लाख करोड़ रुपयों के किस्तों का ब्यौरा तालिका के रुप में निम्नलिखित है:-

क्रं. सं.

किन क्षेत्रों में खर्च

कितनी कीमत के खर्च

01.

MSME एवं ऊर्जा क्षेत्र

5.94 लाख करोड़ रुपये

02.

प्रधानमंत्री गरीब योजना, स्वास्थ्य एवं टैक्स दरों में छूट

1.92 लाख करोड़ रुपये

03.

कृषि एवं श्रमिकों के लिए सहायता

3.10 लाख करोड़ रुपये

04.

मधुमक्खी – मत्स्य पशुपालन, माइक्रो एग्री इन्फ्रा

1.5 लाख करोड़ रुपये

05.

मनरेगा एवं वीजीएफ

48,100 करोड़ रुपये

06.

रिजर्व बैंक द्वारा विभिन्न घोषणाएं

08 लाख करोड़ रुपये

कुल खर्चे

20 लाख 97,063 करोड़ रुपये

      विभिन्न क्षेत्रों में कई तरह के बजट आवंटन के बाद इस खर्चों को उपयोग करने का काम जल्दी ही शुरू हो जाएगा । लेकिन साथ ही सरकार यह भी ध्यान रखेगी की कोविड 19 महामारी से लोगों का बचाव यथासंभव होता रहे और साथ ही जितना जल्दी हो सके, इसकी दवाई या टीका तैयार हो जाए । क्योंकि सदा के लिए इस महामारी के साथ सोशल डिस्टेंसिंग करना संभव नहीं है । सरकार का यह कदम सराहनीय है कि वे दवाईयों के लिए दूसरे देशों पर निर्भर होने की कोशिश में नहीं है । और इस विपदा ने ही सरकार को यह सुझाया है कि जिस तरह हम स्वयं से द्वाईयां बना कर पूरे विश्व की सहायता कर सकते हैं, उसी तरह आने वाले समय में भी चीन पर निर्भरता के बजाए हमें स्वावलंबी होना पड़ेगा ।

An article by SS Raw

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