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कोरोना वायरस ने चेताया, चीन दुनिया के लिए खतरा । अब दुनिया में मेड इन चाइना की जगह लेगा मेड इन इंडिया ।

                             #ChinaIsVirus            #UniteAgainstChina

            कोरोना वायरस । अपने आप में ही दहशत को दर्शाता हुआ यह शब्द आज दुनियाभर के देशों में हजारों की मौत का कारण बन चुका है । लाखों लोग इससे सीधे तौर पर ग्रसित हैं और कई लाखों – करोड़ों का जीवन इसने दुष्वार कर दिया है । फिर चाहे वे ग्रसित लोगों के परिजन हों या फिर वे करोड़ों लोग जिनका रोजगार बुरी तरह से प्रभावित हुआ है । दुनिया भर का शेयर बाजार औंधे मुंह आ गिरा है । खरबों डॉलर का नुकसान हर बड़े देश ने उठाया है और हर दिन के साथ यह बढ़ता ही जा रहा है । अमरीका से लेकर जापान चीन, भारत, पूरा यूरोप, कनाडा, आस्ट्रेलिया आदि जैसे बड़े कारोबारी देशों ने एक – दूसरे के साथ किसी भी प्रकार का हवाई या जमीनी मार्ग से होने वाला यातायात पूरी तरह रोक दिया है । अधिकतर देशों ने अपने बहुत से वायरस ग्रसित शहर एवं राज्यों को पूरी तरह बंद कर दिया है । इटली, स्पेन आदि जगहों पर तो लोग घरों से भी बाहर नहीं निकल पा रहे हैं ।

            ऐसा मंजर इतिहास में शायद ही पहले कभी देखा गया हो क्योंकि इससे पहले यदि कोई महामारी कभी किसी शहर या देश में आई भी हो तो भी उस समय पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था इतनी अधिक एक – दूसरे पर कभी भी निर्भर नहीं थी । 2002 में सार्स का प्रकोप भी पूरी दुनिया में फैला था और वह कोरोना से अधिक तेजी से फैला था, क्योंकि वह हवा के जरिये फैल सकता था । उस समय भी दुनिया ने इस हद तक नुकसान नहीं झेले थे । वैश्वीकरण के इस दौर ने कई सालों में दुनिया को आपस में जोड़ा और कोरोना वायरस ने कुछ ही दिनों में दुनिया को एक – दूसरे से अलग भी कर दिया ।

            लेकिन इस भयानक मंजर की जिम्मेदारी भी अवश्य ही किसी को तो उठानी होगी । सभी जानते हैं कि इसका सीधा जिम्मेदार चीन ही है । हालांकि चीन ने अपने कुतर्कों से इसका ठीकरा अमरीकी सेना पर फोड़ने की कोशिश की है, किंतु किसी भी देश ने इस मामले में उसका साथ नहीं दिया । फिलहाल सभी का ध्यान अपने देश में आई विपदा की ओर है तथा डॉनल्ड ट्रंप के सिवाए कोई भी चीन को कोसता नहीं दिख रहा है । किंतु जब हम इस महामारी की चपेट से बाहर आ जाएंगे और जनजीवन सुचारू रूप से चलने लगेगा तो क्या अर्थव्यवस्था भी उसी तरह चल पड़ेगी जैसी पहले चलती थी ? जवाब है नहीं । दुनिया को सस्ता एवं अधिक मात्रा में माल पहुँचाने का काम कुछ दशकों से चीन ने ही संभाला हुआ है । लेकिन जिस तरह से पहले चीन की खाने की विधंवस्तक आदतों ने इस बिमारी को जन्म दिया और फिर इसके फैलने की खबर को दुनिया भर से छुपाने की कोशिश की । और जिस डॉक्टर ने इसे दुनिया को बताकर सतर्क करने की कोशिश की, उसे मरवा भी दिया, जोकि चीन ने आधिकारिक तौर पर मान भी लिया है । और उसकी इसी लापरवाही ने दुनिया के अस्तित्व पर खतरा उत्पन्न कर दिया है । दुनिया भर की बड़ी कंपनिया, जिनका सामान चीन में बन कर विदेशों में बिकता था, आज उनकी फैक्ट्रियों में ताले जड़े हुए हैं । खेल जगत में मृतप्राय शांति बनी हुई है । ऐसा अनुमान है कि दुनिया को इससे 3 ट्रिलियन डॉलर से अधिक का आर्थिक नुकसान झेलना पड़ सकता है और दुनिया में मंदी का भीषण काल फिर से छा सकता है । और यही सही समय है भारत के पास कि उन सभी उद्य़ोगों के नुकसान को भारत के फायदे में परिवर्तित किया जाए ।

            भारत को ऐसा करने के लिए सरकारी तौर पर आक्रमक कदम उठाने होंगे । निम्नलिखित वे कदम या बिंदु हैं जो भारत के पक्ष में हो सकते हैं तथा ऐसे कारण भी, जिनके आधार पर भारत स्वयं की अर्थव्यवस्था को चीन से ऊपर उठा सकता है:-

            1.    पश्चिमी विशेषज्ञों द्वारा ऐसा माना जा रहा था कि चीन के सबसे करीब का पड़ोसी होने के नाते तथा उसके साथ 100 बिलियन डॉलर का व्यापार होने के चलते भारत इस महामारी की चपेट में सबसे अधिक होगा, लेकिन हुआ इसका ठीक उलट । भारत ने स्वयं को इससे काफी हद तक बचा कर रखा है, लेकिन यूरोप में इस वायरस ने तबाही मचा कर रख दी है । इसीलिए वे किसी भी हाल में अपनी जरूरत की वस्तुएं भी चीन से लेने से कतराएंगे । ऐसे माहौल में भारत एक आशा की किरण बन कर उभर सकता है । चीन के बाद जो बहुत बड़ी उत्पादक क्षमता वाला देश ऐशिया में है वह भारत ही है ।

            2.         भारत को विश्व के सभी उद्योग जगत को यह समझाना होगा कि जिस तरह की चीन की साम्यवादी सरकार की सरंचना है, वह आने वाले सालों में दोबारा ऐसा कर सकती है । चीनी सरकार केवल अपना मुनाफा देखती है और जिस तरह 2002 में सार्स और अब कोरोना चीन द्वारा फैला है, उससे चीन पर विश्वास करना कठिन है । बेशक भारत में भी कुछ महामारियां फैली हैं, लेकिन भारत ने उन्हें छोटे स्तर पर ही रोक दिया था । और यदि किसी गलती से उन महामारियों का वैश्विक होने का खतरा होता, तो भी भारत का प्रजातंत्र उसके लिए दुनिया को पहले ही चेता देता, जिससे की दुनिया समय रहते संभल जाती और किसी कंपनी को अन्य देशों में अपना माल बेचने में अधिक दिक्कत नहीं आती ।

            3.    भारत न केवल उत्पादक क्षमता अधिक कर सकता है, किंतु पश्चिमी देशों के मुकाबले बहुत ही सस्ते श्रमिक यहां उपलब्ध हैं, जिससे चीन से उठ कर भारत आने वाली फैक्ट्रियों को सस्ता माल बनाने में काफी मदद मिलेगी ।

            4.    उन उद्यौगों को न केवल सस्ते श्रमिक मिलेंगे, बल्कि अपना माल यूरोप, अमरीका व अफरीका जैसे देशों में भेजने के लिए मुंबई, गुजरात, चेन्नई जैसे अनेकों बड़े – बड़े बंदरगाह भी आसानी से मिल सकेंगे, जिनकी बहुतायत के कारण माल निर्यात करना भी सस्ता ही होगा ।

            5.    पिछले साल 2019 में भारत सरकार द्वारा कॉर्पोरेट टैक्स की दरें भी 10 फीसदी तक कम हुई हैं । यह भी आने वाले उद्धोगों के लिए फायदे का सौदा होने वाला है ।

            6.    अमरीका के रक्षा मंत्री, राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार और यहां तक की अमरीका के राष्ट्रपति भी इस महामारी को चाईनीज वायरस एवं वुहान कोरोना वायरस ही बुला रहे हैं । इससे साफ है कि आने वाले समय में अमरीका तथा अधिकतर यूरोपीय देश भी चीन की घेराबंदी करने में जुटे हुए हैं । उनकी इसी दुश्मनी का फायदा भारत को उठा कर यह मुद्दा सयुंक्त राष्ट्र और अमरीका जैसे बड़े देशों के सामने रखना चाहिए कि दुनिया को जानबूझ कर आर्थिक संकट में डालने व हजारों लोगों की जान जाने का कारण बनने के लिए चीन पर कड़े प्रतिबंध लगाने चाहिए । ऐसे काम में भारत की मजबूत विदेश नीति व विदेशी संबंध काम आएंगे । जिस प्रकार से भारत ने बालाकोट हमले व कश्मीर से धारा 370 हटाने को विदेशी स्तर पर संभाल लिया था ।

            7.    भारत वैश्विक उद्योगों के समक्ष यह मुद्दा भी रख सकता है कि चीन की मौजूदा पीढ़ी व आने वाली पीढ़ी भारत के मुकाबले बूढ़ी होगी । जबकि भारत में नौजवानों की संख्या अधिक है, जोकि उद्योग जगत की सबसे बड़ी जरूरत होती है ।

            आने वाले इस परिवर्तन के तहत Raw Politics द्वारा एक मुहिम चलाई जा रही है, जिसे सभी #ChinaIsVirus और #UniteAgainstChina लिख कर समर्थन दे सकते हैं ।

Article  & Analysis by SS Raw

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