article-image
भारत के कारण डसॉल्ट एविएशन के हथियारों की बिक्री में 100% की बढ़ोतरी।

 

2019 में कतर, मिस्त्र और भारत को राफेल लड़ाकू विमानों की एक्सपोर्ट में तेजी के कारण फ्रांस के डसॉल्ट एविएशन ग्रुप ने पहली बार दुनिया भर में टॉप 25 हथियार बेचने वाली कंपनियों में जगह बनाई है।

स्टॉकहोम इंटरनेशनल पीस रिसर्च इंस्टीट्यूट SIPRI द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार, डिफेन्स सेक्टर की सबसे बड़ी 25 कंपनियों द्वारा हथियारों की बिक्री से की कुल कमाई 2019 में 361 बिलियन अमरीकी डॉलर है, जो 2018 के मुकाबले में 8.5% की वृद्धि है। यह रिपोर्ट यह भी बताती है कि साल की सबसे बड़ी वृद्धि – 105% रही है, जो फ्रांसीसी निर्माता डसॉल्ट एविएशन द्वारा रिपोर्ट की गई थी।

इस एविएशन ग्रुप ने 2018 में सौंपे गए नौ के मुकाबले 2019 में कतर, मिस्त्र और भारत को 26 राफेल फाइटर जेट सौंपे। फ्रांसीसी निर्माता ने 2019 में 24.5% शुद्ध लाभ दर्ज किया, जो 713 मिलियन यूरो तक पहुंच गया। वहीँ 2018 में एक्सपोर्ट राजस्व 1.4 बिलियन यूरो से 4.2 बिलियन यूरो तक पहुंच गया था।

 

राफेल ट्विन-इंजन फाइटर जेट 2004 से फ्रांसीसी वायु सेना के साथ सेवा में है, लेकिन फ्रांस ने कई सालों से इस फाइटर जेट को बेचने के लिए लंबे समय तक संघर्ष किया है। पहला आर्डर 2015 में मिस्त्र से 24 फाइटर जेट के लिए 5.2 बिलियन यूरो यानि (5.9 बिलियन US$) जिसमे एक FREMM मुल्टीपर्पस फ्रिगेट और मिसाइलों की सप्लाई) भी शामिल थी। दूसरा आर्डर कतर से मिला था, जिसने 2015 में 24 फाइटर जेट्स के आर्डर दिए थे, वहीँ 2018 में 12 एडिशनल फाइटर जेट्स के आर्डर दिए गये थे, इसी बीच, भारत और फ्रांस के बीच भी बातचीत चल रही थी। भारत को 36 राफेल की डिलीवरी के लिए 2016 में फ्रांस के साथ 8.7 बिलियन डॉलर के समझौते के अनुसार जुलाई में पांच जेट मिले। रिपोर्ट्स की मानें तो 16 और राफेल फाइटर जेट्स को अगले साल अप्रैल तक भारतीय वायु सेना के 'गोल्डन एरो' स्क्वाड्रन में शामिल किया जाएगा।

फ्रांसीसी मूल के इस फाइटर जेट ने आधुनिक फीचर्स के बावजूद कई सालों से खरीदार नहीं देखे थे, लेकिन हाल ही में इंडोनेशिया ने इसे नोटिस किया है, फ्रांसीसी रक्षा मंत्री फ्लोरेंस पैली ने पुष्टि की है कि इंडोनेशिया वास्तव में अपने देश के लिए राफेल जेट खरीदने में दिलचस्पी रखता है और यह डील अंतिम चरण में है।

इंडोनेशिया के रक्षा मंत्री प्राबवो सुबियांतो ने अक्टूबर में फ्रांस की अपनी यात्रा के दौरान 48 राफेल खरीदने की बात कही थी, लेकिन फ्रांसीसी रक्षा मंत्री ने 36 राफेल के आर्डर को कन्फर्म किया है।

एक और देश जो खरीदारों की सूची में शामिल हो गया है वह है ग्रीस। टर्की, ग्रीस के बीच धमकियों के बाद 12 सेकंड-हैंड और 6 नए राफेल लेने वाला है, जिसमें 2021 में उसको पहला फाइटर जेट मिलेगा। नवंबर में फ्रांस ने ग्रीस को 18 राफेल फाइटर जेट्स की बिक्री को मंजूरी दी थी, जिससे 1.7 बिलियन यूरो में ग्रीस राफेल को खरीदने वाला पहला यूरोपीय देश बन गया।

अगर किस्मत डसॉल्ट के पक्ष में रही, तो क्रोएशिया भी राफेल के लिए आर्डर दे सकता है। उनके रक्षा ने कहा है कि क्रोएशिया 12 लड़ाकू जेट की योजना बद्ध खरीद पर बहुत जल्द फैसला लेगा।

यूएस नेवी पायलट के यूएफओ देखे जाने के दो साल बाद, लीक हुई तस्वीरें ने फिर से एलियन होने की बहस को छेड़ दिया है, क्या वो वाकई एलियन थे?

2018 में अटलांटिक महासागर के ऊपर एक जेट को उड़ाते हुए, क्यूब आकर वाले UFO को अमरीकी नौसेना के पायलट द्वारा आकाश में देखा गया था। ‘UFO’ की लीक तस्वीरों ने एक बार फिर से एलियंस के अस्तित्व पर एक नई बहस छेड़ दी है। खबरों के मुताबिक, जो पायलट नेवी के बोइंग F/A-18F सुपर हॉर्नेट फाइटर पर बैकसीट वेपन सिस्टम ऑपरेटर था, उसने अपने निजी सेल फोन का यूज़ करके ऑब्जेक्ट की तस्वीर ली थी।

यह तस्वीर अमरीकी रक्षा विभाग की अन-ऑयडेनटीफायड एरियल फेनोमिना टास्क फोर्स (Unidentified Aerial Phenomena Task Force) से संबंधित एक खुफिया रिपोर्ट में पहली बार सामने आई थी। अमरीकी खुफिया एजेंसियों के बीच यह अनक्लासिफाइड तस्वीर सुर्ख़ियों की वजह बनी रही। पेंटागन ने अन-ऑयडेनटीफायड फ्लाइंग ऑब्जेक्ट, यूएफओ को "क्यूब के आकार" और सिल्वर कलर का बताया। तो क्या वास्तव में यह एक अंतरिक्ष यान था या किसी अन्य ग्रह से भेजा गया एक जहाज था?

तस्वीरें देखने से यह यूएफओ उल्टी घंटी के आकर का दिखता है, यानि नीचे की ओर अधित फैला हुआ दिखता है, विशेषज्ञों का मानना है की यह चीज एक जीपीएस ड्रापसोंड (dropsonde) हो सकता है जो पैराशूट से जुड़ा मौसम जांचने का उपकरण होता है। हालांकि, द डेब्रिफ के सीनियर इनवेस्टिगेटिव जर्नलिस्ट, टिम मैकमिलन के अनुसार, ऐसा लगता नहीं है कि तस्वीर में कोई ड्रापसोंड उपकरण है।

मैकमिलन ने एक वायुमंडलीय शोधकर्ता से बात करके पता लगाया था कि इस उड़ती चीज़ के ऊपर किसी प्रकार के एयरक्राफ्ट होने के कोई संकेत नहीं थे, जो इस डिवाइस को गिरा सकता था। इस बात पर भी शक है कि कहीं वो यूएफओ हकीकत में एक रिसर्च बैलून तो नहीं था, जो हीलियम जैसी हल्के गैसों से भरा होता है और ऊंचाई पर उड़ान भरता है। लेकिन मैकमिलन ने दो रक्षा अधिकारियों से बात की, जिससे उन्हें पता चला कि ऐसा नहीं था।

अंजान वस्तु का सामना करने वाले पायलटों ने बताया कि आमतौर पर एक गुब्बारे से अलग यह वस्तु पूरी तरह से स्थिर था और तेज़ हवा का भी इसपर कोई असर नहीं दिख रहा था। द डेब्रिफ के अनुसार, UAPTF ने लीक हुई फोटो के साथ दो खूफिया इंटेलिजेंस ’पोजिशन रिपोर्ट’ जारी की थी, जो पुष्टि करती है की कि वो अंजान वस्तु वास्तव में एक एलियन UFO हो सकती है।

विभिन्न सरकारी एजेंसियों के कई स्त्रोतों ने द डेब्रीफ को बताया कि इन रिपोर्टों में UFO के तस्वीरों वाले सबूत शामिल हैं। रिपोर्ट में यह भी स्पष्ट रूप से कहा गया है कि टास्क फोर्स इस संभावना पर विचार कर रही है कि ये अंजान वस्तु जैसा कि अमरीकी खूफिया एजेंसी के एक सूत्र ने कहा है, हो सकता है इन्हें किसी अंजान स्त्रोत की किसी खूफिया जगह से नियंत्रित किया जा रहा हो, जो इस दुनिया के बाहर किसी ओर दुनिया की हो सकती है।

यूएपीटीएफ की रिपोर्ट में यूएफओ की संभावना का जिक्र करते हुए कहा है यह वस्तु स्वतंत्र रूप से बिना पता चले हुए हवा और पानी के नीचे से गुजरने की क्षमता रखता है, समुद्र की सतह के ऊपर चल सकता है और हवा मे अचानक से बहुत तेज़ स्पीड से उडने लगता है।

निक पोप, जिन्होंने ब्रिटिश रक्षा मंत्रालय के लिए यूएफओ की जांच की है, उन्होंने कहा कि रिपोर्टों के खुलासे "असाधारण" हैं। ये खुलासे आश्चर्यजनक हैं, और जनता को पर्दे के पीछे की वास्तविक झलक देते हैं जिससे पता लगता है कि अमरीकी सरकार यूएफओ मुद्दे को किस तरह से हैंडलकर रही है, उन्होंने DailyMail.Com को बताया कि इस नई जानकारी इस बात को पुष्टि करती है कि अमरीकी सरकार UFO की घटना को पहले से ज्यादा गंभीरता से ले रही है। पेंटागन नेपास्ट में बहुत सारे यूएफओ के केस देखे हैं, यहां तक ​​कि आधिकारिक तौर पर हाल के दिनों में ऐसी वस्तुओं के अस्तित्व को स्वीकार भी किया है।

इन वस्तुओं के बारे में दिलचस्प बात यह है कि ऐसा लगता है ये अन-कन्वेंशनलनॉन-जेट बेस्डफ्लाइट प्रोपल्शन सिस्टम से नियंत्रित हो रहे हैं जो किसी भी तरह के एग्जॉस्ट जेट ट्रेल्स को नहीं दिखाते हैं, साथ ही ये पानी, हवा और आकाश में तेजी से नेविगेट करने में भी सक्षम हैं। अब तक किसी भी देश या विभाग ने ऐसी किसी तकनीक के होने का दावा नहीं किया है और केवल समय ही बताएगा कि क्या सरकारें असल में हमारे बीच एलियन जीवन की अस्तित्व को मानेंगी।

Public Comments
No Comments
Top Rated Politicians
Track Your Leader

UPPER HOUSE

LOWER HOUSE