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खुशखबरी! पहली बार GST collection हुआ 1 लाख करोड़ के पार।

      कोरोना काल में यह पहली बार हुआ है कि जीएसटी संग्रह अक्तूबर माह में एक लाख करोड़ को पार कर गया है। यह आंकड़ा वित्त वर्ष 2020-21 में अब तक का सबसे अधिक है। यदि सटीक आंकड़े की बात की जाए तो यह आंकड़ा 1.05 हजार करोड़ रुपये का है। यदि पिछले वित्त वर्ष के अक्तूबर माह से इसकी तुलना की जाए तो पिछले साल यह आंकड़ा 95.379 हजार करोड़ रूपये था। जिसका अर्थ है कि यह 10% अधिक संग्रह है।

      कैसी रही साल की शुरूआत?

      आगे यदि 2019-20 वित्त वर्ष की बात की जाए तो अप्रैल माह में रिकॉर्ड तोड़ टैक्स जमा हुआ था। यह आंकड़ा करीब 1.13 लाख करोड़ था। लेकिन इसी के मुकाबले यदि वित्त वर्ष 2020-21 के अप्रैल माह को देखें तो कोविड 19 के चलते सख्त लॉकडाउन के कारण तो यह आंकड़ा बुरी तरह गिर कर 32 हजार करोड़ तक ही पहुँच पाया। इसके बाद जैसे – जैसे लॉकडाउन खुलता गया जीएसटी संग्रह में प्रति माह बढ़ोतरी होती गई। इस साल का सितंबर भी पिछले साल के सितंबर से अधिक कमाई वाला रहा।

      क्या कहना है सरकार का?

      राजस्व विभाग का कहना है कि लॉकडाउन के चलते जुलाई महीने में आर्थिक विकास की दर -14% रही। वहीं अगस्त में यह -8% थी और सितंबर में जाकर यह 5% में आई। अक्तूबर में तो यह आंकड़ा 10% के अबतक के उच्च स्तर पर आ गया। यह साफ दर्शाता है कि देश आर्थिक सुधार की ओर अग्रसर है।

      अचानक कैसे बढ़ा टैक्स संग्रह?

      दरअसल टैक्स संग्रह बढ़ने का सबसे बढ़ा कारण यही है कि बहुत समय से लोगों ने खर्चे नहीं किए थे। इससे यह स्वभाविक हो गया कि जैसे – जैसे लॉकडाउन में ढील मिलती जाएगी, लोग बाहर निकल कर खर्चे अवश्य करेंगे। इसी कारण से लोग हर माह बाहर निकलते गए और साथ ही कोविड 19 का डर भी कम हुआ और हर क्षेत्र फिर से फलने फूलने लगा।

      क्या थे अन्य कारण?

      इसके अलावा लॉकडाउन के चलते बाजार में मांग की भारी कमी हुई, जिससे देश के आयात स्तर में भी गिरावट नजर आई थी। हालांकि इसी कारण से भारत का विदेशी मुद्रा भंडार लगातार तेजी से भरता गया और अब यह 600 अरब डॉलर के जादुई आंकड़े की ओर अग्रसर है। अक्तूबर में आयात में 9% का तेज सुधार हुआ। साथ थी घरेलू लेन – देन में भी 11% का ईजाफा हुआ। इसके अलावा सितंबर के बाद से त्यौहारों के मौसम का भी आगमन हो चुका है। लोग दशहरा, ईद, करवा चौथ, दिवाली आदि की खरीदारी के लिए भी बाहर निकल कर खर्चे कर रहे हैं। एक और कारण था Input Tax Credit. यानि जितना टैक्स सरकार के पास जमा होता है उसमें से कुछ हिस्सा कंपनियों को वापस दिया जाता है और अब वही पैसा भी खर्चे के रूप में बाजारों में आ गया है।

      किस खाते में कितना टैक्स आया?

      यदि बात कि जाए टैक्स के विभाजन की तो अक्तूबर माह में CGST की कुल रकम रही 19.193 हजार करोड़ रुपये। इसी तरह SGST में 25.411 हजार करोड़ का टैक्स जमा किया गया। यदि बात कि जाए तो IGST में 52.540 हजार करोड़ रुपये आए तथा Cess में 8.011 हजार करोड़ रुपये जमा किए गए। IGST के खाते को केंद्र व राज्य सरकारें आपस में बांटती हैं। इसका अर्थ है कि 52.540 हजार करोड़ में से 25.091 हजार करोड़ रुपये केंद्र सरकार के हिस्से में आए और 19.427 हजार करोड़ रुपये राज्य सरकारों के हिस्से।

      किस राज्य ने कितने कमाए?

      अक्तूबर, 2020 माह में सबसे अधिक टैक्स महाराष्ट्र सरकार ने कमाए, जोकि 15.799 हजार करोड़ रुपये है। इसका आय का सबसे बड़ा स्त्रोत मुंबई है। इसके अलावा कर्नाटका का दूसरा नंबर है, जिसने कुल 6998 करोड़ रुपये कमाए। इव दोनों राज्यों ने अक्तूबर, 2019 के मुकाबले 5% की बढ़ोतरी दर्ज की। तीसरा नंबर आता है तमिलनाडू का जिसने 6901 करोड़ के आंकड़े को छुआ, जोकि पिछले साल के मुकाबले 13% अधिक है।

      आने वाले महीनों में कैसे रहेंगे?

      यदि विषेशज्ञों की माने तो नवंबर के महीने में भी टैक्स संग्रह में बढ़ोतरी देखने को मिलेगी क्योंकि नवंबर में कई त्यौहारों में बाजार अच्छा कारोबार करेंगे। लेकिन असल बात है कि दिसंबर व उसके बाद के महीनों में भी क्या यह संभव होगा। यदि ऐसा होता है तो राजकोषीय घाटे को कम करने में काफी मदद मिलेगी। हालांकि सर्दीयों में कोविड 19 के संभावित खतरे में बढ़ोतरी और ठंड में कारोबार की कमी के कारण आर्थिक विकास में फिर से कमी के आसार भी जताये जा रहे हैं।

      टैक्स संग्रह के मुख्य कारण?

      वैसे तो कई क्षेत्रों में व कारणों से टैक्स संग्रह में सुधार हुआ है। हालांकि यदि मुख्य कारणों की बात की जाए तो पहला मुख्य कारण भारत की अर्थव्यवस्था का बड़ा आकार और इसमें मौजूद मध्यमवर्गीय लोगों की जरूरतें है। जिस कारण से बाजार में मांग हमेशा बनी रहती है और खरीद भी लगातार चल सकती है। इसके अलावा दूसरा कारण है भारत सरकार द्वारा कई क्षेत्रों में लगातार सुधार के कदम विभिन्न क्षेत्रों में पैकेज को डालने से भी भारत की अर्थव्यवस्था को स्थिरता मिली है। इसी कारण से खर्चों में इजाफा हो पाया है। और तीसरा कारण लॉकडाउन खुलते ही त्यौहारों का आगमन।

      आशा है कि भारत की सरकार देश में हो रहे आर्थिक विकास को बढ़ाने में लगातार प्रयासत रहेगी व इस कोरोना काल में शीघ्र ही वैक्सीन का भी आगमन होगा। तभी लोगों में डर कम होगा और बाजारों की चहल पहल भी बढ़ेगी।

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