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तीसरी लहर रोकने के लिए क्या नितिन गडकरी को स्वास्थ्य मंत्री बना देना चाहिए?

            #GadkariforHealthMinister

         इस लेख को अंग्रेजी में पढ़ें:- Should Nitin Gadkari be the next Health Minister to counter the third wave?

      समय आ गया है कि चाईनीज़ वायरस की दूसरी लहर और अधिक फैले और देश की हालातों और अधिक बद्तर करे, तथा तीसरी लहर भी देश का स्वास्थ्य बिगाड़े, इससे पहले ही नितिन गडकरी को देश का स्वास्थ्य मंत्रालय देकर यह सब सही समय पर रोक देना चाहिए।

      नितिन गडकरी देश के सड़क परिवहन और राजमार्ग, जहाज़रानी, जल संसाधन, नदी विकास और गंगा संरक्षण मंत्री हैं। नरेंद्र मोदी कैबिनेट 2019 में वे ऐसे मंत्री हैं जो 2014 से ही अपने कार्यभार को बखूबी निभा रहे हैं।

      उनकी कुशल कार्यशैली ऐसी है कि कभी भी उन्हें किसी विवाद में घिरे नहीं देखा। उनके मंत्रालय ने विश्व रिकॉर्ड कायम करते हुए दुनिया में सबसे तेज 37 किलोमीटर प्रति दिन की तेजी से राजमार्गों का निर्माण किया है और लगातार कर रहा है। वे अपने काम को लगातार बिना किसी व्यवधान के करते आए हैं। यदि यह कहें कि वे मोदी कैबिनेट में सबसे सफल मंत्री है तो इसमें कुछ भी गलत न होगा।

      लेकिन अपनी उपलब्धियों को हासिल करने के लिए उन्होंने इंजीनियरिंग की डिग्री हासिल नहीं की है। उनका काम अपने मंत्रालय की पूर्ण क्षमताओं के साथ सबसे उत्तम परिणाम देने का है। यही तो हमारा संविधान कहता है और इसीलिए नेता या मंत्री बनने के लिए किसी भी प्रकार की शैक्षिक योग्यता नहीं मांगी गई है।

      अब यदि केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री डॉ. हर्षवर्धन की बात करें तो वे इस चाईनीज़ वायरस के दौर में सबसे महत्वपूर्ण व्यक्ति हो गए हैं। उनका या उनके मंत्रालय का लिया गया हर निर्णय देश का हर व्यक्ति को सीधे तौर पर प्रभावित करता है। इसके अलावा महामारी के विपरीत समय में उनपर देश की अर्थव्यवस्था का दायित्व भी उन्हीं पर है।

      लेकिन अफसोस कि महामारी के दोनों काल में स्वास्थ्य मंत्रालय की भूमिका देशवासियों को संतोषजनक नहीं लगी हैं। चाईनीज़ वायरस की दूसरी लहर ने तो देश को जैसे तबाह कर दिया है। ऐसे समय में डॉ. हर्षवर्धन हमें हर जगह दिखने चाहिए थे। दवा कंपनियों से मीटिंग करते हुए, वैक्सीन निर्माताओं से लगातार वार्ताकार में, अस्पतालों को रोज़ निर्देश देते व उनपर कड़ी नज़र रखते हुए, राज्यों के साथ लगातार संपर्क साध कर स्वास्थ संबंधी समस्याओं का जायज़ा लेते व् समाधान देते हुए, मुश्किल घड़ी में जनता से भी राय लेते व अपनी राय देते हुए, आवश्यक दवाईयों की कालाबाजारी पर कड़ी कार्यवाही करते हुए, जनता को ढांढस बंधाते हुए आदि।

      और करते भी क्यों न, आखिर वे हमारे स्वास्थ्य मंत्री जो हैं। लेकिन अफसोस कि हमने उनकी आवाज़ भी शायद नहीं सुनी है। देश के आम नागरिक तक जिस आवाज़ को पहुँचना चाहिए था, उसे किसी ने शायद ही कभी सुना हो। यहाँ तक कि जनता विदेश मंत्री को भी उनसे अधिक गहराई से जानती है।

      स्वास्थ्य मंत्री होने के लिए जरूरी नहीं कि एम.बी.बी.एस. की डिग्री ही हो। मंत्री का काम तो प्रबंधक व् प्रशासनिक सुविधाओं को सुनिश्चित करना होता है। बाकि का काम तो मंत्रालय में अन्य डिग्रीधारी अधिकारी ही करते हैं, मंत्री को तो केवल उनसे काम लेना आना चाहिए।

      बेशक वे बेहतरीन मंत्री होंगे, लेकिन जनता का विश्वास पाने में तो वे सफल नहीं हुए हैं। न ही जनता के साथ जुड़ाव से और न ही स्वास्थ्य व्यवस्थाओं के ही कारण। और इस समय इन्हीं दोनों की जरूरत देश को सबसे अधिक है।

      हमें अधिकतर जगहों पर सीधे प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी ही मोर्चा संभाले हुए दिखते हैं। वे हर कुछ हफ्तों बाद सभी प्रदेशों के मुख्यमंत्रियों के साथ स्वास्थ्य संबंधी व्यवस्थाओं की समीक्षा लेते हैं। वे वैक्सीन की उपलब्धता पर भी नज़र बनाए दिखते हैं। वे सीधे अदार पूनावाला से मीटिंग करते हैं। वे ही लोगों से अपील भी करते हैं। वे ही स्वास्थ्य कर्मचारियों का नियमित रूप से धन्यवाद करते हैं। देखने में ऐसा लगता है कि हर मोर्चा जैसे प्रधानमंत्री के लिए ही छोड़ा गया है।

      हालांकि ऐसा नहीं है कि प्रधानमंत्री और किसी मंत्रालय के कार्यों पर नज़र नहीं रखते हैं। वे देश की सुरक्षा संबंधी समस्याएं भी देखते हैं, वे विदेश नीतिओं पर भी काम करते दिखते हैं। चुनावों में भी वे ही पार्टी का केंद्र होते हैं। गृह मंत्रालय के कार्यक्रमों की भी समीक्षा व दायित्व के लिए वे तैयार रहते हैं। लेकिन इन सभी कामों में वे केवल एक समीक्षक की भूमिका निभाते दिखते हैं, जबकि स्वास्थ्य संबंधी कार्यों में वे ही स्वास्थ्य मंत्री की तरह कार्यरत रहते हैं।

      उदाहरण के लिए जब पिछले वर्ष चीन से गलवान घाटी व अन्य इलाकों में टकराव की स्थिति पैदा हो गई थी तो भारतीय रक्षा मंत्री तत्काल ही रूस जाकर S 400 की डिलीवरी को सुनिश्चित कर आए थे। इसी तरह 2019 में धारा 370, 35A आदि हटाना, कश्मीर को केंद्र शासित प्रदेश बनाना, लद्दाख अलग करना, नागरिकता कानून लाना आदि कार्य गृह मंत्रालय के अधीन थे और हमारे गृह मंत्री अमित शाह संसद के दोनों सदनों से लेकर मीडिया, जनता सबके बीच स्वयं जा – जा कर अपने निर्णयों को समझाने में लगे हुए थे।

      अब जबकि प्रधानमंत्री के तौर पर उनके दूसरे कार्यकाल को मई, 2021 में 2 वर्ष का समय हो चला है तो यह सही समय भी है कि वे अपने कैबिनेट में कुछ आवश्यक फेरबदल करें। ऐसे में इस महामारी के दौर में नितिन गडकरी ही ऐसे सबसे उपयुक्त मंत्री हैं जो देश के स्वास्थ्य को संभाल सकते हैं। इस समय सड़के बनाने से भी अधिक महत्वपूर्ण है चाइनीज़ वायरस से निपटना,  जिसके लिए वे ही सबसे काबिल मंत्री हैं। वरना जो सड़कें उन्होंने अबतक बनाई हैं, वे सूनी ही रह जाएंगी। इसके अलावा इससे प्रधानमंत्री कार्यालय का भी बोझ इस निर्णय से काफी कम होगा।

      नितिन गडकरी की खास बात यह है कि वे समयबद्ध होकर काम करने में विश्वास करते हैं। उनका मैनेजमैंट सभी से कहीं अधिक दिखता है और वे पूरे उत्साह व् आत्मविश्वास के साथ अपने कार्य को सबके समक्ष रखते हैं। इसी कारण से विरोधी खेमे में भी उनकी तूती बोलती है।

      मई, 2021 माह की शुरूआत में ही बीजेपी के राज्यसभा सांसद डॉ. सुब्रहमन्यम स्वामी भी गडकरी को डॉ. हर्षवर्धन की जगह स्वास्थ्य मंत्री की कमान सौंपने की वकालत कर चुके हैं। अब जब बीजेपी के अंदर से भी यही उठ रही हैं तो अच्छा होगा कि मंत्रीमंडल में आवश्यक फेरबदल कर ही देना चाहिए, ताकि देश इस वायरस से निजात पाकर वापस पटरी पर आ सके।

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