article-image
UAE में भारत को मेहमानवाजी और पाकिस्तानियों को वीजा बैन।

      UAE ने पाकिस्तान की बैंड फिर से बजा दी है। संयुक्त अरब अमीरात (UAE) ने इमरान सरकार को बड़ा झटका देते हुए पाकिस्तान के नागरिकों के लिए विजिट वीजा पर बैन का ऐलान कर दिया है। अब इसके पीछे एक वजह है ईजराइल और UAE के बीच बढ़ते रिश्तों से जल भून कर पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान ने UAE की आलोचना की थी।
      संयुक्त अरब अमीरात ने पिछले हफ्ते 12 देशों के नागरिकों के लिए नए वीजा जारी करने पर रोक लगा दी है, जिसमें पाकिस्तान भी शामिल है, जिन 12 देशों पर बैन लगाया गया है उसमें तुर्की, ईरान, यमन, सीरिया, इराक, सोमालिया, लीबिया, केन्या और अफगानिस्तान भी शामिल हैं। वीजा न दिए जाने को लेकर, पाकिस्तानी राजदूत गुलाम दस्तगीर ने सरकार से मिलने की दरख्वास्त की थी, लेकिन UAE के प्रिंस ने मिलने से भी माना कर दिया।

         लद्दाख में फिर हो सकता है खूनी टकराव, लेकिन चीन के लिए नहीं होगा आसान।

      एक रिपोर्ट यह भी है कि UAE में फिलीस्तीन समर्थक पाकिस्तान के समाजिक कार्यकर्ताओं को गिरफ्तार किया जा रहा है। इसके अलावा UAE में रह रहे आम पाकिस्तानी नागरिकों के प्रति अतिरिक्त सख्ती बरती जा रही है और उन्हें छोटे-छोटे जुर्म के लिए भी गिरफ्तार कर जेल में डाला जा रहा है।

      ऐसी जानकारी भी मिली है कि साल 2017 में कंधार में हुए आतंकी हमले, जिसमें UAE के 5 डिप्लोमेट मारे गए थे, उसके तार भी पाकिस्तान से जुड़े हैं। UAE की जांच एजेंसी ने पाया है कि इस हमले के पीछे पाकिस्तान का हक्कानी नेटवर्क आतंकी संगठन शामिल था। इसके अलावा पाकिस्तान की ख़ुफ़िया एजेंसी ISI भी इस हमले में शामिल थी। भारत के खिलाफ ईमरान की नीति और आतंकवाद को लेकर पाकिस्तान के नरम रवैये से न तो सऊदी खुश है और अब UAE ने भी खुलकर नाराजगी जतानी शुरू कर दी है।
महामारी के दौर में यूं तो सभी देशों के नागरिकों ने UAE में नौकरियां खोई हैं, लेकिन पाकिस्तान के सबसे ज्यादा 13000 से भी अधिक नागरिकों की नौकरी चली गई। पाकिस्तान के हर घर से एक व्यक्ति बाहर नौकरी करने जाता है। अब इस बैन के ऐलान के बाद से पाकिस्तान के विदेश मंत्री शाह महमूद कुरैशी संयुक्त अरब अमीरात पहुँच गये हैं

      कौन है झाओ झोंग्की और क्यों भारत इस चीनी पीएलए कमांडर के बाहर निकाले जाने का जश्न मना रहा है?

      भारत में झाओ ज़ोंग्की चीनी पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (पीएलए) पश्चिमी थियेटर कमांडर प्रमुख के बाहर निकलने पर खुशी की लहर है। आखिर क्यों ? क्योंकि यह वही जनरल है जो लद्दाख में भारतीय और चीनी सैनिकों के बीच हुए खूनी टकराव के लिए सीधे तौर पर जिम्मेदार है, इसी के उकसावे के बाद चीनी सैनिक इतने ज्यादा आक्रामक हुए थे कि सात महीनों से अधिक समय से दोनों देशों के बीच टकराव की वजह यही जनरल है।

      झाओ इस साल की शुरुआत में 65 वर्ष की रिटायरमेंट की उम्र तक पहुंच गया था, लेकिन राष्ट्रपति शी जिनपिंग की सहमति की वजह से अब तक चीनी पीएलए को कमांड कर रहा था। वह 1984 से पीएलए में हैं। भारत और भूटान के खिलाफ कट्टर झाओ को 2017 डोकलाम में भूटान, चीन और भारत के ट्राइक्यूलेशन में मिलिट्री स्टैंडऑफ में भी शामिल माना जाता है।

      एक बात जरुर है कि झाओ के बाहर निकलने से भारत में उम्मीद जगी है कि इसको रिप्लेस करने वाला कमांडर "भारत विरोधी" न हो तो ये दोनो देशों के रिश्तों के लिए अच्छा होगा। हालाकिं भारत और चीनी मिलिट्री कमांडरों की अगली मीटिंग के दौरान पीएलए कमांडर के टोन और बात करने के लहजे से साफ हो जायेगा कि पीएलए में अन्दर ही अन्दर क्या खिचड़ी पक रही है, या  विरोध की कोई लहर दौड़ भी रही है या नहीं? या ये सिर्फ हम भारतीय सोच रहे हैं।

      चीनी राष्ट्रपति शी के करीबी माने जाने वाले झाओ ने 20 वर्षों तक तिब्बत में सेवा की और 2016 से वेस्टर्न कमांड की कमान संभाल रहे थे। एक संपन्न कैरियर के साथ और अपने कार्यों को अंजाम देने में निर्मम होने की छवि के साथ, चीनी विशेषज्ञों का मानना ​​है कि झाओ की नज़र सेंट्रल मिलिट्री कमांड में किसी ऊँचे पोजीशन को संभालने की थी, सेंट्रल मिलिट्री कमांड चीनी कम्युनिस्ट पार्टी के सैन्य मामलों में हाईएस्ट डिसिशन मेकिंग बॉडी है, जिसमें जाने के बाद झाओ 72 साल की आयु तक सेवा में रह सकता था।

      चीन द्वारा डिप्लोमेटिक और मिलिट्री बातचीत के दौरान अपनाई गई लाइन बार बदलती रही है, जो दर्शाता है कि झाओ स्थिति को सामन्य करने, लड़ाई से पीछे हटने और स्थिति सामान्य करने के खिलाफ था। शायद उसके हटाये जाने की यही वजह हो सकती है, जिसकी वजह से दोनों देशों के रिश्ते ख़राब हो रहे थे।

      गलवान घाटी में 15 जून को हुई हिंसक झड़प के बाद, जिसमें 20 भारतीय सैनिक शहीद हुए थे। हालाकिं इसमें 100 चीनी सैनिकों के मारे जाने की बात भी सामने है, लेकिन आखिर ये झड़प हुई क्यों? चीन और भारत का बॉर्डर वो बॉर्डर हैं जहाँ 1962 या 1967 के बाद से कभी हथियार नहीं उठे, फिर इस बार ऐसा क्यों हुआ? भारत का मानना है कि झाओ को पांगोंग के पास के क्षेत्र में घुसपैठ के लिए शी की मंजूरी थी, लेकिन ये घुसपैठ खूनी टकराव में बदल जायेगा, यह जिनपिंग ने भी नहीं सोचा होगा। जिसकी वजह से चीन के लिए परेशानियां बढ़ गयी।

         चीन भारत से लगी सीमा LAC के पास तैनात कर रहा है आयरन मैन सोल्जर्स।

      झाओ को जनरल झांग जुदोंग द्वारा बदल जाएगा, जिन्होंने भारतीय सीमा के करीब कभी भी सेवा नहीं दी है। वो ज्यादातर चीन के पूर्वोत्तर शेनयांग में तैनात रहे हैं। यह क्षेत्र अब उत्तरी थिएटर कमांड की अधिकार में आता है। पहले के कमांडरों के विपरीत, झांग सेंट्रल कमिटी या नेशनल पीपुल्स कांग्रेस का सदस्य नहीं रहा है और उसके पास कोई राजनैतिक समर्थन भी नहीं है।

      उम्मीद यही है कि ये मिलिट्री कमांडर भारत चीन रिश्तों में और दरार ना लाये, ठंडे दिमाग से काम करे, और 15 जून जैसी घटनाओं से बचे और उन्हें फिर से न दोहराये।

      Boeing F/A-18 Super Hornet ‘Ready’ For Indian Navy As It Clears ‘Ski-Jump’ Test

      स्की-जंप’ टेस्ट क्लियर करने के साथ ही बोइंग F/A-18 सुपर हॉर्नेट हैं इंडियन नेवी के लिए रेडी

      यूएस नेवी ने रैंप से बोइंग F/A -18 सुपर हॉर्नेट की "स्की जंप" टेस्ट को प्रदर्शित करके भारतीय नेवी के लिए इसकी उपयोगिता को साबित कर दिया है। भारतीय नेवी के फाइटर जेट्स की फ्लीट में शामिल होने के लिए यह फाइटर जेट उपयुक्त है, यह भी साबित हो गया हैय़ इससे यह बात भी साफ़ हो गयी है कि भारतीय नेवी के साथ F/A -18 सुपर हॉर्नेट की डील सही ट्रैक पर है।

      नेवल एयर स्टेशन पैक्सेंट नदी, MD में आयोजित प्रदर्शनों से पता चलता है कि सुपर हॉर्नेट इंडियन नेवी के शॉर्ट टेकऑफ़ बट अरैस्टेड रिकवरी (STOBAR) सिस्टम के साथ अच्छा प्रदर्शन करेगी, जो बोइंग द्वारा पहले के सिमुलेशन टेस्ट्स में साबित हो चुका है। स्की-जंप से F/A -18 सुपर हॉर्नेट के पहले सफल और सुरक्षित लॉन्च के साथ इस फाइटर एयरक्राफ्ट की भारतीय नौसेना के एयरक्राफ्ट कैरियर से साथ जुडने की सफल कहानी की शुरुआत हो गई है।

      STOBAR वह सिस्टम होता है जो एक एयरक्राफ्ट कैरियर के डेक से एक फाइटर जेट की लांच और रिकवरी के लिए इस्तेमाल होता है। आसान शब्दों में इसका मतलब है कि यह सिस्टम फाइटर जेट को एयरक्राफ्ट की डेक से छोटी सी हवाई पट्टी से टेकऑफ करने और फिर से डेक पर उतरने में मदद करता है।

      यह सफल टेस्ट स्पष्ट रूप से F/A -18 ब्लॉक III सुपर हॉर्नेट फाइटर जेट जो F-18 फाइटर जेट्स का एक उन्नत संस्करण है, भारत द्वारा उसे खरीदे जाने की ओर एक महत्वपूर्ण पड़ाव है, बीते कई सालों में हॉर्नेट ने अपनी क्षमताओं को साबित कर दिया है। इसी वजह से इन्हें सबसे सक्षम 4th जनरेशन के फाइटर जेट्स में से एक माना जाता है।

      ट्विन-इंजन, मल्टीरोल, एयरक्राफ्ट कैरियर से उड़ान भरने की क्षमता रखने वाला बोइंग F/A -18 सुपर हॉर्नेट फाइटर मैकडोनेल डगलस F/A -18 हॉर्नेट का ही एक प्रकार है। बोइंग के अनुसार, आज की डेट में हॉर्नेट्स सबसे घातक, एडवांस्ड, जंग में तपा हुआ, मुल्टीरोल फ्रंटलाइन फाइटर जेट्स में से एक है और यह तमगा उसने जंग में अपनी काबिलियत साबित करके पाया है।

      क्या वाकई तीसरे विश्व युद्ध का खतरा मंडरा रहा है । क्या अमरीका व् चीन युद्ध की ओर बढ़ रहे हैं या यह किसी और प्रकार की लड़ाई होने वाली है ?

      सुपर हॉर्नेट में हवा से हवा में मार करने वाली मिसाइलों के साथ-साथ हवा से ज़मीन में मार करने वाली हथियारों की क्षमता भी है। जिसमें एक इंटरनल 20 mmM61 रोटरी केनन यानि तोप इसे मिसाइलों को ले जाने में मदद करता है। बोइंग डिफेंस इंडिया (BDI) के अनुसार, ब्लॉक III संस्करण में रणनीतिक लिहाज़ से लगभग हर मिशन को सफलतापूर्वक अंजाम देने की क्षमता है।

      इनमें एयर सुपीरियोरिटी, दिन और रात दोनों समय सटीकता से हमला करने की क्षमता, फाइटर एस्कॉर्ट, क्लोज एयर सपोर्ट, दुश्मन की एयर डिफेन्स को तबाह करने की क्षमता, समुद्री अभियान, निगरानी, टोही मिशन, फॉरवर्ड एयर कण्ट्रोल और दूसरे विमानों से ईंधन भरने की क्षमता शामिल हैं, जिसे buddy refuelling कहते हैं।

      F/A-18 ब्लॉक III सुपर हॉर्नेट न केवल भारतीय नौसेना को बेहतर वॉर-फाइटिंग क्षमता प्रदान करेगा, बल्कि अमेरिका और भारत के बीच नेवी और एविएशन के क्षेत्र में आपसी सहयोग के रास्ते भी खोलेगा। F/A-18 ब्लॉक III सुपर हॉर्नेट सिंगल और टू-सीटर फाइटर जेट वेरिएंट P8i एयरक्राफ्ट के साथ मिलकर भारतीय नौसेना को बेजोड़ विकास क्षमता देंगे।

      इसकी कम रख-रखाव कीमत का फायदा भी भारत को होगा और साथ ही इसमें एडवांस्ड नेटवर्क टेक्नोलॉजी, बड़े फ्यूल टैंकों के साथ, इन्फ्रारेड सर्च एंड सिस्टम भी मिलेंगे, जो ज्यादा दूरी तक दुश्मन पर नज़र रख पाएंगे। नए एडवांस्ड कॉकपिट सिस्टम के साथ 10,000+ घंटे की लाइफ मिलेगी, जो किसी और फाइटर जेट में मुमकिन नहीं है।

      साथ ही बोइंग इस फाइटर जेट की रख-रखाव भारतीय नेवी के साथ मिलकर करने पर राज़ी हो गयी है, जिससे एयरक्राफ्ट रख-रखाव में महारत हासिल करने में भी मदद मिलेगी।

Public Comments
No Comments
Top Rated Politicians
Track Your Leader

UPPER HOUSE

LOWER HOUSE