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ब्रिटेन को पाकिस्तानी चैनलों का हिन्दू और भारत विरोधी कंटेंट क्यों नहीं दिखता?

      एक खबर यह आई है कि ब्रिटिश ब्राडकास्टिंग रेगुलेटरी अथॉरिटी Ofcom ने अर्नब गोस्वामी के शो “पूछता है भारत” पर 20000 पाउंड्स यानि लगभग 20 लाख रुपये का जुर्माना ठोका है। जिसकी वजह बताई गयी है, पाकिस्तान विरोधी कंटेंट और पाकिस्तानी लोगों के लिए भिखारी और आतंकवादी जैसे शब्दों का इस्तेमाल और पाकिस्तानी मेहमानों के साथ बदसलूकी, जोकि ब्रिटेन के कोड ऑफ़ कंडक्ट को तोड़ता है।

      अब बात करते हैं रिपब्लिक भारत के शो की, इस 35 मिनट के डिबेट में भारतीय चंद्रयान 2 मिशन पर बात की गयी थी। ब्रिटिश ofcom को भारत के डिबेट में हेट स्पीच नज़र आया, लेकिन क्या कभी ब्रिटेन ने पाकिस्तानी न्यूज़ चैनल्स देखे हैं? अगर देख लें तो पाकिस्तान के हर एक चैनल को बंद करना पड़ेगा। ऐसा एक भी चैनल नहीं जो भारत और हिन्दुवों को गाली नहीं देता हो, और यह एक शो, एक डिबेट, एक न्यूज़ चैनल की बात नहीं, पाकिस्तान का हर एक चैनल, सुबह से शाम तक 24 घंटे हिंदुस्तान और हिन्दुवों को गाली देता है। यहाँ तक कि खुद न्यूज़ ऐंकर्स हिन्दुवों को लाइव चैनल पर गाली देते हैं। जैसे ओरिया मकबूल, इनके हर न्यूज़ शो में हिंदुवो को गाली दी जाती है, हिन्दू क्या सिख्खों और ईसाईयों को भी।

         UAE में भारत को मेहमानवाजी और पाकिस्तानियों को वीजा बैन।

      न्यूज़ चैनल क्या टीवी शो, मूवी और टीवी ड्रामों में हिन्दुवों का नाम लेकर उन्हें बुरा भला कहा जाता है। उनके किरदार को चोर उचक्का, लुटेरा, गन्दा दिखाया जाता है, कभी ब्रिटेन को उसमे हेट स्पीच नज़र क्यू नहीं आया?

      भारतीय न्यूज़ चैनल के चंद्रयान शो में पाकिस्तानियों को लताड़ना नज़र आता है, लेकिन पाकिस्तानी स्पेस & साइंस मिनिस्टर फवाद चौधरी हिंदुस्तान की स्पेस मिशन को ट्विटर और पाकिस्तानी न्यूज़ चैनल्स पर गाली देता है, उसको कबाड़ा कहता है, उसका मजाक बनाता है, क्या ब्रिटेन ने कभी वो नहीं देखा? ब्रिटिश ब्राडकास्टिंग एजेंसी को भारतीय शो में पाकिस्तान को लेकर असहिष्णुता नज़र आती है, लेकिन पाकिस्तानी 24 घंटे दूसरे धर्मो, देशो को लेकर असहिष्णु हैं। पाकिस्तानी भारतीय हाई कमीशन में हमले करते हैं, तब हेट क्यों नहीं दिखता?

      सऊदी अरब और यूएई के बाद, अब भारत और इजराइल टर्की को भी करेंगे पाकिस्तान से दूर

      ऐसी खबरे आ रही हैं कि तुर्की और इजराइल में दोस्ती बढ़ रही है। दोनों देश एक दूसरे के साथ मतभेद भुलाकर रिश्तों को मजबूत करना चाहते हैं। जिसका मतलब एक तरफ भारत सऊदी अरब और यूएई को अपने खेमे में कर रहा है और अब इजराइल पाकिस्तान के खास दोस्त को छीनने की तैयारी कर चुका है।

      हाल ही में कुछ मुस्लिम देशों ने ईजराइल को मान्यता दे दी, जिसमें यूएई, बहरीन, सूडान पहले ही मान्यता दे चुके हैं और सऊदी अरब की भी दोस्ती इजराइल से बढ़ रही है।

      यही नहीं पाकिस्तान के खास दोस्त तुर्की ने 2018 के बाद, पहली बार इजराइल में अपना राजदूत नियुक्त कर दिया है। यहाँ गौर करने की बात ये है कि 2017 में अमेरिका द्वारा जेरुसलम को इजराइल की राजधानी के रूप में मान्यता देने के बाद से दोनों देशो के बीच किसी तरह के डिप्लोमेटिक सम्बन्ध नहीं थे। लेकिन पाकिस्तान के लिए झटका ये नहीं है। झटका ये है की जिस तुर्की से पाकिस्तान कुछ भीख की उम्मीद पर था, वही तुर्की खुद अमेरिका से रहम की उम्मीद कर रहा है। जी हाँ, रूस से S-400 लेने की वजह से ट्रम्प ने तुर्की पर प्रतिबंधों की बौछार कर दी थी, जिससे तुर्की की आर्थिक हालत ख़राब हो गयी थी।

      वहीँ कश्मीर के लिए सऊदी अरब से पंगा लेकर पाकिस्तान का कटोरा वैसे ही खाली है, कश्मीर तो न मिला, सऊदी अरब ने उलटे अपने 1 बिलियन डॉलर का ऋण वापिस मांग लिया। यहाँ तक भी सऊदी अरब का जी नहीं भरा तो उसने भीख के साथ साथ तेल की सप्लाई भी बंद कर दी है।

         चीन भारत से लगी सीमा LAC के पास तैनात कर रहा है आयरन मैन सोल्जर्स।

      भारतीय वायुसेना से जुड़ने वाला है एक और बेजोड़ हथियार, जो पाकिस्तान और चीन की नींद कर देगा हराम, 2021 तक तैयार हो जायेंगे अस्त्र-IR मिसाइल।

      अस्त्र एयर टू एयर बियॉन्ड विसुअल रेंज मिसाइल जो भारत में ही डिजाईन और डेवेलप किये गये हैं, इन मिसाइलों में दुश्मन के टारगेट्स का पता लगाने के लिए इमेजिंग इन्फ्रारेड होमिंग सीकर लगाये गए हैं। आमतौर पर इस तरह की मिसाइलों में रेडियो फ्रीक्वेंसी रडार लगाये जाते हैं।

      इन्फ्रारेड होमिंग एक पैसिव वेपन गाइडेंस सिस्टम है, जो एक टारगेट से इंफ्रारेड से रिफ्लेक्ट होती हुई IR लाइटसोर्स का यूज़ करके उसे ट्रैक और फॉलो करता है। इन्फ्रारेड सीकिंग मिसाइलों को अक्सर "हीट-सीकर्स" भी कहा जाता है क्योंकि कोई भी गर्म चीज़ बॉडी इन्फ्रारेड लाइट रिफ्लेक्ट करती है, यहाँ तक की हमारी बॉडी भी इसके अलावा गाड़ियों के इंजन और फाइटर जेट्स भी हीट जेनरेट करते हैं और इन्फ्रारेड रिफ्लेक्ट करते हैं और इसलिए इन्फ्रारेड वेवलेंथ में इन्फ्रारेड रिफ्लेक्ट करती हुई ऑब्जेक्ट बैकग्राउंड में बिलकुल साफ नज़र आती है, इस तरह की सिस्टम रात को भी आसानी से किसी भी टारगेट की पती लगा सकती है। इसके अलावा यह सिस्टम रडार की तरह कोई रेडियो वेव्स भी नहीं छोड़ते, इसलिए यह चुप चाप बिना दुश्मन के राडार और सिस्टम द्वारा पता चले हुए काम करते रहते हैं।

      इन्फ्रारेड सीकर्स एक पैसिव डिवाइस है यानि निष्क्रिय डिवाइस हैं, जो रडार से अलग, कोई संकेत नहीं देते हैं कि वो एक निशाने पर नज़र रख रहे हैं। इसलिए इनका इस्तेमाल आमने सामने के मुठभेड़ों के अलावा लंबी दूरी से चुपके से हमला करने के लिए किया जाता है। हीट-सीकर्स और भी ज्यादा घातक हो जातें हैं, जब इन्हें फॉरवर्ड सीकिंग इन्फ्रारेड या इसी तरह की दूसरी अन्य सिस्टम के साथ इस्तेमाल किया जाता है।

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      भारत के पहले इन्फ्रारेड होमिंग सीकर से लैस बियॉन्ड विसुअल रेंज एयर टू एयर अस्त्र मिसाइल अपने कैप्टिव फ्लाइट ट्रायल्स के लिए 2021 तक तैयार हो सकते हैं। ये टेस्ट सुखोई 30MKI फाइटर जेट्स से किया जायेगा, इन मिसाइलों को टेस्ट करने के लिए सुखोई में कुछ तकनीकी बदलाव भी किये गये हैं। साथ ही भविष्य में सभी अस्त्र बियॉन्ड विसुअल रेंज मिसाइल टेस्ट्स जिसमें अस्त्र MK2 भी शामिल है, इसी फाइटर जेट से किये जायेंगे। यानि सुखोई 30MKI को टेस्टबेड की तरह इस्तेमाल में लाया जायेगा।

      इन्फ्रारेड सीकर सिस्टम लगाये जाने के बाद, इसकी नई रडोम यानि रडार सिस्टम को भी टेस्ट किया जायेगा कि ये दोनों सिस्टम IR और RF रडार दोनों ठीक से काम कर रहें हैं या नहीं। अगर सब कुछ योजना के मुताबिक रहा, तब सिर्फ इन्फ्रारेड सीकर्स को टेस्ट किया जायेगा। इन्फ्रा-रेड को मिसाइल पर एक्टिवेट किया जा सकता है और यह एयरक्राफ्ट के फायर कण्ट्रोल रडार से किसी भी गाइडेंस के बिना इंडिपेंडेंट स्कैन कर सकता है।

      कैप्टिव ट्रायल्स में अस्त्र-IR सीकर को सर्च मॉड मे एक्टिव करके टेस्ट किया जायेगा। जिसमें ये देखा जायेगा की यह सीकर दुश्मन के टारगेट्स का पता लगाने में कितना कारगर है। उसी अनुसार इसकी सर्च, रेंज और सटीकता बढ़ाने के लिए इसमें नए बदलाव किये जायेंगे। अस्त्र IR में ज्यादातर उपकरण अस्त्र RF से ही अडैप्ट किये गये हैं, जिनपर पहले कई बार टेस्ट किया जा चुका है। मतलब ये पहले से टेस्ट किए जा चुके हैं, यहाँ तक कि इन्फ्रारेड सेंसर को भी दूसरी मिसाइल से एडाप्ट किया गया है। इसलिए इस प्रोजेक्ट के बहुत जल्दी पूरा होने की उम्मीद है, जिसके बाद 2021 में इसकी असल टेस्ट फायरिंग भी पहले से निर्धारित है।

      एक बात और इन्फ्रारेड होमिंग सीकर से लैस मिसाइलों को लांच से पहले या लांच के बाद भी लॉक किया जा सकता है। DRDO शोर्ट रेंज क्लोज कॉम्बैट मिसाइलों को डेवेलप करने की प्लानिंग में है। लेकिन अस्त्र-RF और अस्त्र-IR मीडियम और शोर्ट रेंज एयर टू एयर मिसाइलों की तरह इस्तेमाल किये जायेंगे। वहीँ अस्त्र-IR की रेंज 0.5 किलोमीटर से लेकर 40 से 50 किलोमीटर तक हो सकती है। इनके आने से एक बात साफ है कि भारतीय वायुसेना की ताक़त में एक और बेजोड़ हथियार जुड़ जायेगा जो भारत की सुरक्षा को और ज्यादा मज़बूत करेंगे।

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