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कोवैक्सीन या कोवीशील्ड – कौन सी वैक्सीन है आपके लिए बेहतर?

      कुछ समय से यह बहस शुरू हो गई है कि भारत में कोविड के चलते जो टीकाकरण हो रहा है, उनमें से कौन सी वैक्सीन ज्यादा फायदेमंद है। सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया द्वारा कोविशील्ड तथा भारत बायोटेक द्वारा कोवैक्सीन नामक दो वैक्सीन भारत भर में तेजी से लोगों को लगाई जा रही हैं।

      कोविशील्ड की रिसर्च ऑक्सफॉर्ड यूनीवर्सिटी, युनाईटेड किंगडम में की गई है और इसका निर्माण भारत में किया जा रहा है। वहीं कोवैक्सीन पूरी तरह से भारत में ही निर्मित है। हालांकि दोनों की निर्माण कंपनियाँ भारतीय ही हैं। साथ ही 01 मई, 2021 से रूस में रिसर्च हुई वैक्सीन स्पूतनिक – 5 का भा टीकाकरण शुरु किया जाएगा।

      Covaxin दूसरी लहर में सबसे अधिक कारगर - अमरीकी डॉक्टर ऐंथॉनी फॉची।

      कैसे काम करती है कोवैक्सीन?

      कोवैक्सीन के निर्माण में मूलत: कोरोना वायरस का निष्क्रिय रूप डाला जाता है और शरीर में यह बताता है कि शऱीर को इस वायरस के प्रति प्रतिरोधक क्षमता बनानी है। इससे शरीर वायरस के प्रति एंटीबॉडी बनाना शुरू करेगा। इस निष्क्रिय वायरस के शरीर में प्रवेश करने से कोई नुकसान नहीं होता हैं क्योंकि निष्क्रिय होने के कारण यह और अधिक फैल/बढ़ नहीं सकता है।

      कैसे काम करती है कोवैक्सीन?

       वहीं कोवीशील्ड में chimpanzee adenovirus – chAdOx1 को रूपांतरित किया गया है और ये कोविड 19 के स्पीईक प्रोटीन लेकर शरीर में प्रवेश करेंगे। इसी स्पीईक प्रोटीन के प्रति शरीर उसी प्रकार से काम करने लगेगा, जैसा कोवैक्सीन के प्रति करता है।

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       दूसरा डोज़ कब लगवाएं?

       विशेषज्ञों के अनुसार, इन दोनों वैक्सीनों में दो डोज़ दिए जाएंगे और कोवैक्सीन का दूसरा डोज़ 4-6 हफ्तों के बीच ले लिया जाना चाहिए। वहीं कोवीशील्ड को भी 4 हफ्तों के बाद लिया जा सकता है, किंतु यदि 6 हफ्तों के बाद इसे लिया जाए तो यह और अधिक कारगर सिद्ध होगा। हालांकि इसका यह अर्थ बिलकुल नहीं कि 4 हफ्तों के बाद लिए जाने पर इसका कोई नुकसान हो।

       यह भी कहा गया है कि इन वैक्सीनों को हाथ के बाजूओं के ऊपर ही लगवाएं।

       कितनी कारगार हैं दोनों वैक्सीन?

       अभी तक की रिसर्च में यह पाया गया है कि कोवीशील्ड 70 प्रतिशत तक कारगर साबित हो रही है। हालांकि ऐसा नहीं है कि बाकि के लोगों में इसका असर नहीं होगा। वहीं कोवैक्सीन 78 प्रतिशत तक कारगर साबित हो रही है।

       इसके अलावा यह भी बोला जा रहा है कि यह मृत्युदर के विरुद्ध 100 प्रतिशत तक भी कारगर साबित हो रही है। यानि इसे लगवाने के बाद शायद कोविड से मृत्यु होगी ही नहीं।

       लेकिन इसे ऐसे समझना बिलकुल गलत होगा कि कोविशील्ड लगवाने के बाद भी शायद मृत्यु हो या कोवैक्सीन लगवाने के बाद व्यक्ति को कुछ भी नहीं होगा। यह केवल अब तक के आंकड़ों पर निर्धारित जानकारी है। दोनों ही वैक्सीन असरदार साबित हो रही हैं और अच्छे नतीजे ला रही हैं।

       यह बात जानना सबसे जरूरी है कि अब तक की रिसर्च के अनुसार कोवीशील्ड और कोवैक्सीन दोनों ही अब तक कोरोना के जितने भी रूप (स्ट्रेन) आए हैं, उन सभी पर कारगर साबित हो रहे हैं।

       कोविशील्ड में छोटे – मोटे साईड इफ्फेट देखने को मिले हैं किंतु कोवैक्सीन में ऐसा कुछ देखने को नहीं मिला। हालांकि ऐसा माना जा रहा है कि ऐसा इसलिए भी है क्योंकि कोवीशाल्ड को बड़ी मात्रा में दुनिया भर के कई देशों में लगाया जा चुका है। जबकि कोवैक्सीन अब तक केवल बहुत कम संख्या में लोगों को लगाई गई है।

       इसके अलावा यदि किसी को किसी भी प्रकार की बड़ी ऐलर्जी हो जाती है पहले बेहतर होगा कि अपने डॉक्टर से परामर्श लेकर ही टीकाकरण करवाएं।

       अंतत: निष्कर्ष यही निकलता है कि अब तक के आंकड़ों के अनुसार दोनों ही वैक्सीन अब तक वायरस के सभी तरह के स्ट्रेन पर कारगर सिद्ध हो रही है और इसीलिए बिना झिझक के कोई भी वैक्सीन लगवाई जा सकती है। किसी भी प्रकार के संशय में अपने डॉक्टर से परामर्श लेकर ही टीकाकरण करवाएं।

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