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शहीद पति की आखिरी इच्छा हेतु परिवार की पहली अफसर बनेंगी ज्योति।

      जम्मू-कश्मीर में शहीद नायक दीपक नैनवाल की पत्नी ज्योति नैनवाल अब सेना में शामिल होने जा रही हैं। ज्योति ने अपने चौथे प्रयास में एसएससी परीक्षा पास की थी। अब ज्योति एक साल के प्रशिक्षण के लिए चेन्नई के ऑफिसर्स ट्रेनिंग अकादमी जाने वाली हैं।

      जम्मू-कश्मीर में 2018 में सेना के ऑपरेशन में गोली लगने के बाद शहीद हुए नायक दीपक नैनवाल की 32 वर्षीय पत्नी ज्योति नैनवाल भारतीय सेना में एक अधिकारी के रूप में शामिल होने जा रही हैं। यह उनके पति की आखिरी इच्छा थी कि उनके जाने के बाद वो देश की सेवा करें। ज्योति जल्द ही अपने आठ और पांच साल के बच्चों को छोड़ कर, एक साल के प्रशिक्षण के लिए चेन्नई के ऑफिसर्स ट्रेनिंग अकादमी जाने वाली हैं। ज्योति ने अपने चौथे प्रयास में सेना की सबसे कठिन शारीरिक और मनोवैज्ञानिक परीक्षाओं में से एक एसएससी पास कर अपने ससुरालवालों की परंपरा को जारी रखा है, जो तीन पीढ़ियों से सेना में अपनी सेवाएं दे रहे हैं।

      इसके साथ ही एक बार कमीशन होने के बाद, वह अपने परिवार में पहली अधिकारी होगी, क्योंकि अन्य सदस्यों ने जवानों के रूप में और अन्य गैर-अधिकारी रैंक में काम किया है। ज्योति ने कहा है कि वह अपने पति की अंतिम इच्छा को पूरा करने पर खुश हैं। साथ ही बताया कि उनके पति ने अस्पताल में उनके सेना में शामिल होने की इच्छा जताई थी।

         

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      ज्योति ने बताया, ‘रीढ़ और छाती में गोली लगने के बाद, वे अपने शरीर के निचले हिस्से में सभी सेंस खो चुके थे. दिल्ली के अस्पताल में अपने आखिरी 40 दिनों के दौरान, उन्होंने एक बार मुझे सेना में शामिल होने के लिए कहा था’. उन्होंने भारतीय सेना का भी धन्यवाद अदा किया। उन्होंने कहा कि वे भारतीय सेना की शुक्रगुजार हैं कि उन्होंने उनके पति की अंतिम इच्छा का सम्मान करने का मौका दिया।

      ज्योति के ससुर ने क्या कहा?

      ज्योति के ससुर, रिटायर्ड कैप्टेन चक्रधर नैनवाल ने कहा कि बहू के दृढ़ संकल्प और कड़ी मेहनत ने उन्हें ये सफलता दिलाई है। उन्होंने कहा, ‘वह सुबह 3:30 बजे उठती थी, ताकि पड़ोसी उसे जॉगिंग करते हुए नहीं देख सके। एथलेटिक वियर में एक्सरसाइज करने वाली एक महिला को हमारे क्षेत्र में सामान्य रूप से नहीं देखा जाता. उन्होंने ये भी कहा कि अपने पति को खोने के बाद दो छोटे बच्चों की देखभाल करने वाली एक महिला के लिए ये काफी कठिन है।’

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      'स्मेलिकॉप्टर' क्या है और वैज्ञानिक इसे मंगल ग्रह पर क्यों भेजना चाहते हैं?

      वैज्ञानिकों की एक टीम ने स्मेलिकॉप्टर नाम का एक यूनिक ऑटोनोमस ड्रोन का निर्माण किया है, जिसका इस्तेमाल वैज्ञानिक मंगल पर गंध का पता लगाने के लिए कर सकते हैं।

      बायोइनपिरेशन एंड बायोमिमेटिक्स जर्नल में पब्लिश्ड एक स्टडी के अनुसार, स्मेलिकॉप्टर हवा में ट्रेवल करने के दौरान बाधाओं को सेंस करके उनसे बच सकता है। इसमें गंध को सेंस करके नेविगेट करने के लिए लाइव एंटीना लैस है। लाइव का मतलब यहाँ किसी इलेक्ट्रॉनिक एंटीने से नहीं बल्कि कीट पतंगे से एक्सट्रेक्ट किये गए एंटीने से है।

      जिस वजह से कीटों को इस प्रोजेक्ट के लिए चुना गया है, वह इस कारण है कि ये कीट अपने एंटीने का इस्तेमाल करके आसपास के वातावरण में केमिकल को सेंस करके खाने के सोर्स या अन्य पतंगों की दिशा में नेविगेट करने की काबिलियत रखते हैं।

      यह ड्रोन आकार में छोटा है और यह उन जगहों में भी आसानी से जाने की क्षमता रखता है, जहां इन्सान या बड़े ड्रोन, रोबोट्स नहीं जा सकते। स्मेलिकॉप्टर खतरनाक से खतरनाक टास्क को अंजाम दे सकता है, जिसमें ज्यवालामुखी के करीब जाना, अनस्टेबल स्ट्रक्चर या प्राकृतिक आपदा के बाद उस जगह तक पहुंचना शामिल है। यहाँ तक कि यह खतरनाक हथियारों और बमों के करीब भी जा सकते हैं, जहाँ इंसानों का जाना जानलेवा साबित हो सकता है।

      रिसर्चर द्वारा केमिकल्स को हवा में सूँघकर खतरनाक परिस्थितियों में उड़ान भरने की क्षमता पर काम चल रहा है, ताकि इस ड्रोन का इस्तेमाल आपदा से बचे लोगों, विस्फोटक, गैस लीक जैसे स्थानों को ट्रेस करने के लिये किया जा सके।

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      भविष्य में इस ड्रोन का इस्तेमाल मंगल ग्रह पर भी किया जा सकेगा, हालाकिं यह कीट मोथ एंटीना मंगल ग्रह के वातावरण में कैसे बर्ताव करेगा, यह अभी साफ नहीं है। लेकिन अगर यह ड्रोन मंगल पर सरवाइव कर गया, तो यह वहाँ भी केमिकल्स को सूँघ कर नेविगेट कर पायेगा।

      जहाँ एक तरफ कृत्रिम सेंसर हवा में मँडराते समय गंध के बेस पर ट्रेवल करने या गंध वाले पौधों की पहचान करने, प्रक्रिया करने और उनका पीछा करने के लिए संवेदनशील या तेज़ नहीं होते हैं, वहीँ दूसरी तरफ प्राकृतिक सेंसर पोर्टेबल आर्टिफीसियल सेंसर की तुलना में गंध का पता लगाने में बेहतर होते हैं। मॉथ एंटीना छोटे, हल्के, कम पॉवर का इस्तेमाल करने वाले साथ ही कृत्रिम सेंसर की तुलना में बेहद संवेदनशील होते हैं।

      इससे पहले कि कीटों की एंटीना को उपयोग के लिए हटाया जाये, इन्हें फ्रिज में बेहोशी के हालत में स्टोर किया जाता है, यानि अनेसथेटाईज्ड करके, स्मेलिकॉप्टर को नेविगेट करने के लिए GPS की आवश्यकता नहीं होगी और यह अपने आसपास का पता करने के लिए एक कैमरे का इस्तेमालकरेंगे। ठीक वैसे ही जैसे एक कीट अपनी आंखों का इस्तेमाल करते हैं।

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