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राहुल गाँधी कोअब कांग्रेस का अध्यक्ष पद संभाल लेना चाहिए: सचिन पायलट ।

      जयपुर में राजस्थान के उप मुख्यमंत्री सचिन पायलट ने कहा कि राहुल गाँधी को कांग्रेस पार्टी की अध्यक्षता पद की जिम्मेदारी फिर से संभाल लेनी चाहिए । इसको लेकर राजस्थान की प्रदेश कांग्रेस कमेटी ने प्रस्ताव पारित किया है और मांग की है कि राहुल गाँधी फिर से पार्टी की राष्ट्रीय कमान संभालें ।

      इससे पहले राहुल गांधी ने 2017 में राष्ट्रीय अध्यक्ष का पद संभाला था और 2019 के लोक सभा चुनावों में कांग्रेस की बुरी तरह हुई हार की जिम्मेदारी लेते हुए इस्तीफा दे दिया था । हालांकि तब भी कांग्रेस पर आरोप ही लगे थे कि पार्टी की अध्यक्षता फिर से सोनिया गाँधी ही संभालेंगी क्योंकि आजतक कांग्रेस का राष्ट्र अध्यक्ष गाँधी परिवार से बाहर किसी ने भी लंबे समय के लिए नहीं बनाया गया है ।

      हालांकि यह आरोप बिलकुल सही भी हैं । इससे पहले कांग्रेस की राष्ट्र अध्यक्षता सोनिया गाँधी के पास थी, जिसे बाद में राहुल गाँधी ने संभाल लिया । और जैसे आरोप लगे थे, वैसा ही हुआ भी । जल्दी ही पार्टी की कमान को सोनिया गाँधी ने संभाल लिया, जिससे कांग्रेस की और अधिक किरकिरी हुई ।

      कांग्रेस पार्टी में कई बड़े नाम हैं, जो यदि पार्टी अध्यक्ष बने तो शायद पार्टी की गिरती साख और दोनों सदनों में गिरती संख्या को ऊपर उठा सकते हैं । इतिहास में शायद ऐसा दौर कांग्रेस पर कभी नहीं आया था और राहुल गांधी के कमान संभालने के बाद से हर बार उनका संख्याबल लगातार गिरा ही है । इसीलिए एक समय महाराष्ट्र में अपना मुख्यमंत्री बनाने वाली कांग्रेस आज वहां तीसरे नंबर की पार्टी है जो केवल अपनी साख के लिए वहां की सरकार से जुड़ी हुई है, ताकि उनके पास यह कहने को हो कि उनकी सरकार भी किसी प्रदेश में चल रही है ।

      हालांकि इससे पहले पंजाब और राजस्थान में वे पूर्ण बहुमत से सरकार चला रहे हैं, लेकिन जिस तरह समय उनपर गाज बन कर पहले त्रिपुरा, गोवा, कर्नाटका और फिर इसी साल की शुरूआत में मध्यप्रदेश में बनकर गिरा था, उनके बाकि के प्रदेशों पर भी लगातार खतरा मंडरा रहा है ।

      इससे अच्छा होता कि कांग्रेस गाँधी परिवार के मोह को छोड़ कर पायलट जैसे धुरंधर चेहरों को राष्ट्रीय कमान संभालने को देती तो देश की जनता भी आज एक अच्छे और मजबूत विपक्ष को देख रही होती, जो अपना काम भलिभांति संभालती । राजस्थान चुनाव की जीत में भी पायलट की भूमिका अति महत्वपूर्ण रही थी और इसी तरह मध्यप्रदेश चुनाव में ज्योतिरादित्य सिंधिया की भी ।

      लेकिन जिस तरह पायलट स्वयं ही राहुल गाँधी के नाम को तरजीह दे रहे हैं, उसे देखते हुए ऐसा लगता तो नहीं कि कांग्रेसी फिलहाल के लिए गाँधी परिवार से बाहर झांक कर देखेंगे । कहीं ऐसा न हो कि समय रहते कदम न उठाने के कारण जिस तरह मध्यप्रदेश में सिंधिया व उनके साथियों न बगावत की, उसी तरह कोई राजस्थान या पंजाब में भी पार्टी को चुनौती दे डाले । इस मामले में कांग्रेस पार्टी को दूर तक सोचने की जरूरत है ।

      पायलट ने चीन को लेकर हो रहे गतिरोध पर भी अपनी टिप्पणी दी । उन्होंने केंद्र सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि देश के 20 सैनिकों की शहादत आखिर क्यों हुई । केंद्र की ओर से फिलहाल चीन के साथ हो रहे विवाद पर सरकार का कोई सपष्टीकरण नहीं आया है ।

      उन्होंने आगे कहा कि लद्दाख में गलवान घाटी में भारतीय जवान शहीद हुए थे, उनकी याद में राजस्थान में ब्लॉक व जिला स्तर पर शुक्रवार यानि 26 जून को “शहीदों को सलाम दिवस” कार्यक्रम किया जाएगा । इसके तहत प्रदेश भर में कांग्रेस कार्यकर्ता सुबह 11 बजे से 12 बजे तक विभिन्न क्षेत्रों में शहीदी स्मारक या महात्मा गांधी की प्रतिमा या फिर स्वतंत्रता सेनानियों को समर्पित स्थलों पर बैठकर श्रृद्धांजलि अर्पित करेंगे ।

      उन्होंने लगातार केंद्र सरकार पर कई वार किए और पेट्रोल व डीजल के प्रतिदिन बढ़ रहे दामों पर कहा कि दुनिभर में कच्चे दामों की कीमतें घट रही हैं और मोदी सरकार देशवासियों की कमर लगातार तोड़ रही है, जोकि कोरोना वायरस की चपेट के कारण अर्थव्यवस्था में आई भीषण मंदी से पहले ही जूझ रही है । इससे जनता में आक्रोश है । इसी कारण से उनकी पार्टी जिला स्तर पर प्रदर्शन कर उसका ज्ञापन माननीय राष्ट्रपति महोदय को सौंपेगी ।

      हालांकि उनके इस कदम से लगता नहीं कि सरकार किसी किस्म के दबाव में आएगी । यह तो केवल इसीलिए किया जा रहा है क्योंकि कांग्रेस का केंद्र में कोई अधिक दबदबा नहीं है । और राजस्थान में वे पूर्ण बहुमत में हैं । साथ ही पायलट एक राष्ट्रीय चेहरा है और जो वे कहेंगे, उसकी गूंज न सही, लेकिन उसकी खनक तो दूर तक जाएगी । साथ ही इस तरह के धरने व बैठकें स्थानीय लोगों को प्रभावित करने के लिए होते हैं ।

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