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Key Ministers in Modi Cabinet

1. नितिन गडकरी

आज जिस स्तर पर मोदी सरकार का वर्चस्व है, उसमें मोदी जी के साथ – साथ उनके कुछ मंत्रीयों का भी भरपूर योगदान रहा है । जिनमें सबसे प्रमुख हैं नितिन गडकरी । वे उन चुनिंदा मंत्रियों में से एक हैं, जिनकी साफ छवि और बेहतरीन काम की प्रशंसा आम जनता से लेकर विपक्षी पार्टियां भी खुलकर करती हैं । पाँच सालों के रिकॉर्ड उपलब्धियों के साथ उन्होंने मोदी सरकार के दूसरी पारी में भी अपना कार्यकाल बनाए रखा है । वे बेशक बेबाक अंदाज़ में अपनी बात सबके बीच रखते हैं, लेकिन ऐसा करने के बावजूद वे किसी विवाद में नहीं फंसते । वे बेहद सफाई और सटीकता से राय देने में विश्वास रखते हैं ।

2. पीयूष गोयल

नितिन गडकरी की तरह पीयूष गोयल ने भी मोदी सरकार की दूसरी पारी में अपना कार्यकाल बनाए रखा है । सुरेश प्रभु के जगह रेलवे मंत्रालय को संभालने के बाद से अब तक उन्होंने अपना कार्यभार बखूबी संभाला है । वे भी विवादों से बचते हुए अपने काम को बहुत ही बढ़िया ढंग से संभालते हैं और इसीलिए वे प्रधानमंत्री मोदी के चहेतों में से एक हैं । अब देखना होगा कि दूसरे कार्यकाल में वे रेलवे को कितना आगे ले जाते हैं, क्योंकि रेलवे सबसे अधिक रोजगार देने वाले संस्थानों में से एक है और इस पर देश के परिवहन का बड़ा हिस्सा निर्भर करता है ।

3. रवि शंकर प्रसाद

निर्विवादित होकर काम करने वालों की सूची में अगला नाम रवि शंकर प्रसाद का है । वर्तमान में कानून एवं दूरसंचार मंत्री का पद संभाल रहे रवि शंकर प्रसाद को “डिजीटल तकनीक एवं ई – गवर्नमेंट” के क्षेत्र में वर्ष 2018 में “The Economic Times” द्वारा बीस सबसे अधिक प्रभावशाली वैश्विक नेताओं में शामिल किया गया । 2019 में पटना साहिब लोकसभा क्षेत्र से भारी मतों से जीतकर आए प्रसाद के कार्यकाल में भारत में डिजिटल तकनीक को गांवों – गांवों तक पहुँचाया, इसके अलावा साईबर सुरक्षा, ई – गवर्नमेंट आदि क्षेत्रों में भी उन्नत प्रगति की । इन्हें बीजेपी का संकटमोचन भी कहा जाता है ।

4. राजनाथ सिंह

पहली मोदी सरकार में गृह मंत्री और दूसरी में रक्षा मंत्री के तौर पर काम कर रहे राजनाथ सिंह बीजेपी के एकलौते वरिष्ठ नेता हैं, जो वाजपयी सरकार में भी मंत्री रह चुके हैं । इसके अलावा वे उत्तर प्रदेश के मुख्य मंत्री भी रह चुके हैं । उन्होंने 2014 के लोकसभा चुनावों में नरेंद्र मोदी के नाम का समर्थन उस समय किया था, जब बहुत से लोग लालकृष्ण आडवाणी का समर्थन कर रहे थे । इसी कारण से वे मोदी कैबिनेट में एकलौते वरिष्ठ नेता हैं ।

5. निर्मला सीतारमण

वर्तमान में वित्त मंत्रालय संभालने वाली निर्मला सीतारमण के ऊपर इस समय सबसे अधिक एवं महत्वपूर्ण जिम्मेवारी है । गिरती अर्थव्यवस्था को संभालना एवं रोजगार के अवसर पैदा करना आने वाले समय में और भी अधिक चुनौतीपूर्ण होगा । लेकिन पिछले कार्यकाल में राफेल सौदे जैसे बड़े एवं गंभीर परियोजनाओं को पार लगाने वाली रक्षा मंत्री के तौर पर स्वयं को प्रमाणित करने के पश्चात प्रधानमंत्री मोदी ने उनपर विश्वास जताया है, जिस कारण से उनसे आशाएं और अधिक बढ़ गई हैं ।

6. सुब्रह्मण्यम जयशंकर

38 साल के उच्च दर्जे के राजनयिक के तौर पर काम कर चुके सुब्रह्मण्यम जयशंकर वर्तमान में विदेश मंत्री हैं । उनका पूरा व्यवसायिक जीवन विदेश नीतियों के इर्द – गिर्द ही रहा है और वे कई देशों में भारत की ओर से उच्च पदों में कार्यरत रहे हैं । भारत और अमरीका के बीच असैनिक परमाणु समझौते में उनका अहम योगदान भी रहा है । पहले मोदी कार्यकाल में वे विदेश सचिव के रूप में अपनी सेवाएँ देते रहे, और इन्हीं खूबियों के कारण उन्हें वर्तमान में विदेश मंत्री का दायित्व दिया गया है । जिस तेज़ी से वैश्विक घटनाक्रम बदल रहे हैं, आने वाले समय में उनकी जिम्मेवारियों में बढ़ौती के साथ प्रधानमंत्री को उनसे आशाएं भी बढ़ती ही जाएंगी ।

7. स्मृति ईरानी

तीखे शब्दों की धनी और बेबाक भाषणों में पारांगत स्मृति ईरानी यूं तो पहले मोदी कार्यकाल में कई विवादों के कारण मानव संसाधन मंत्रालय से हटाकर कपड़ा मंत्रालय सौंप दिया गया था, किंतु 2019 के लोकसभा चुनाव में उन्होंने कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष राहुल गांधी को अमेठी से भारी मतों से हराकर एक तरह का इतिहास रच दिया । इससे पहले अमेठी कांग्रेस का मजबूत गढ़ हुआ करता था । दूसरे मोदी कार्यकाल में वे कपड़ा मंत्रालय के साथ – साथ महिला एवं बाल विकास मंत्रालय का कार्यभार बखूबी निभा रही हैं और वह भी निर्विवादित तरीके से – जैसा की प्रधानमंत्री उनसे अपेक्षा रखते हैं ।

8. अमित शाह

मोदी कार्याकाल के पहले दौर वे राष्ट्रीय अध्यक्ष रहकर पार्टी का विस्तार करते रहे और दूसरे कार्यकाल में प्रधानमंत्री के सबसे करीबी मंत्री व् सबसे घनिष्ठ मित्र माने जाने वाले अमित शाह अब तक के सबसे विवादस्पद मंत्री भी बन चुके हैं । छह माह के भीतर ही उन्होंने उस समस्या को हल करने का साहस दिखाया, जो कई दशकों से भारत के भूभाग और इतिहास के लिए कांटा बना हुआ था । पहले धारा 370 को हटाया व जम्मू - कश्मीर तथा लद्दाख को अलग किया और उसके बाद नागरिकता कानून को लागू करके यह साबित कर दिया कि वे आने वाले समय में बिना परिणामों की चिंता किए बगैर देशहित में निर्णय करते रहेंगे ।

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