Top Challenges for India
01. गिरती अर्थव्यवस्था

      साल 2020 चुनावों का साल नहीं है। फरवरी में दिल्ली और अक्तूबर-नवम्बर में बिहार चुनावों के अलावा कोई बड़े चुनाव इस साल यह देश नहीं देखेगा। ऐसे में केंद्र में बैठी मोदी सरकार चुनावी गठजोड़ के बजाए कुछ अनसुलझे मुद्दों और समस्याओं पर ध्यान देना अधिक पसंद करेगी। इसी सूची में दस बड़े मुद्दे जो रह – रह कर मोदी सरकार को चुनौती देंगे उनमें सबसे पहला है देश की अर्थव्यवस्था।

      साल 2019 की तरह ही साल 2020 भी मोदी सरकार के लिए अर्थव्यवस्था को सुधारना किसी भी चुनौती से बढ़कर है। लेकिन कोविड 19 ने देश की अर्थव्यवस्था पर जो चोट लगाई है, उसकी शायद किसी ने कल्पना भी नहीं की थी। फिलहाल इस वर्ष तो दुनियाभर में किसी की भी अर्थव्यवस्था उठने का कोई अनुमान नहीं है, किंतु फिर भी भारत की पहले से ही चरमराती अर्थव्यवस्था को इस गंभीर चोट से उबारना सबसे बड़ी चुनौती रहेगी। नए पेश किए बजट और पिछले साल घटाई टैक्स दरों से सरकार को काफी उम्मीदें है, लेकिन दुनिया भर में आई मंदी की काट खोजना भी सरकार के लिए अब भी सिरदर्द बनी हुई है । कई राहत पैकेजों की भी घोषणा की गई है, किंतु उनके नतीजे जल्द देखने को तो नहीं मिलेंगे। यदि इस साल देश तरक्की करता है तो कई समस्याएं भी इसके साथ ही कम हो जाएंगी।

02. बेरोजगारी

      यह एक ऐसी समस्या है जो सीधे तौर पर अर्धव्यस्था से जुड़ी हुई है। लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि अच्छी अर्थव्यवस्था इस समस्या को पूरी तरह खत्म कर देगी। बेरोजगारी उन दुर्लभ समस्यओँ में से एक है, जो शायद कभी खत्म न हों। यह लोगों की कौशल, पीढ़ी, क्षेत्र, तकनीक, शिक्षा आदि जैसे स्तंभों पर निर्भर करता है और इसीलिए जो इस सब के साथ तालमेल नहीं बिठा पाते, वे बेरोजगारी की जद में अधिक धंसते जाते हैं।

      कोविड 19 के चलते देश की बेरोजगारी दर में बहुत बड़ा उछाल आया है और चीन के निवेशों पर अंकुश लगाने के बाद से इसमें बढ़ोतरी ही हुई है। अब यदि इस आपदा को यदि भारत अवसर के रूप में बदलने में सक्षम रहता है तो भारत सालों से चली आ रही इस बेरोजगारी में भारी कमी ला सकता है। किंतु जब तक कोरोना का कोई स्थाई इलाज नहीं मिल जाता, इसकी संभावना बेहद कम है।

03. चीन और पाकिस्तान

      हालिया दिनों में वास्तविक नियंत्रण रेखा पर चीन ने जो दुस्साहस दिखाया है, वह पहले कभी नहीं किया था । बेशक डोकलाम में बहुत बड़ा स्टैंडऑफ हुआ था, किंतु तब भी भारत को यही उम्मीद थी कि चीन के साथ यदि मैत्री संबंध बनाए रखें, तो हालात युद्ध स्तर तक नहीं जाएंगे । किंतु गलवान घाटी में भारतीय जवानों के बलिदान ने सब कुछ बदल कर रख दिया है । अब ऐसा लगता नहीं कि दोनों देशों के बीच हालात पहले जैसे सामान्य हो पाएँगे ।

      अब हर समय यही कयास लग रहे हैं कि दोनों देशों की सेनाएं बेशक पीछे चली गई हों, किंतु चीन अब और विश्वास योग्य नहीं रह गया है । इसी के चलते भारत ने चीन का आर्थिक तौर पर बहिष्कार करना शुरू कर दिया है, जोकि शायद बहुत पहले कर देना चाहिए था । इसी के साथ भारत को बहुत ही कम समय में स्वयं को बड़े स्तर के युद्ध के लिए तैयार रहना चाहिए, क्योंकि चीन अकेला युद्ध नहीं करेगा, बल्कि दूसरी ओर से पाकिस्तान के वार को भी रोकना होगा । इसके लिए अमरीका या किसी और पर भारत कभी निर्भर नहीं होगा ।

04. अराजकता

      हर साल देश में ऐसे मुद्दे या तो उत्पन्न होते हैं या किसी दल, समुदाय, पार्टी आदि द्वारा उत्पन्न किए जाते हैं, जोकि देश को पीछे खींचने का काम करते हैं । गौहत्या, राफेल विमान की खरीद, ईवीएम मशीन की खराबी, नागरिकता कानून आदि जैसे मुद्दे देश को हर समय जकड़े रहते हैं, जिसके कारण देश में ही नहीं, विदेशों में भी भारत के विरुद्ध नकारत्मक विचारधारा उत्पन्न होती है । और यदि इस मुद्दों की जड़ों में जाया जाए तो असल में ये मुद्दे देश की असली समस्याओं को ढक देते हैं, जिससे वे समस्याएं भी और अधिक बढ़ती जाती हैं ।

      मोदी सरकार की कोशिशों में यह साफ दिखा है कि इस तरह के मुद्दे, जो देश में अराजकता का काम करती हों, उनका बलपूर्वक मुकाबला किया जाए । हालांकि नए दौर में किसी भी घटना को मुद्दा बना कर जनता को भड़काया जा सकता है, और ऐसे में इस बात की संभावना कम ही दिखती है कि नित नए मुद्दे जोकि देश की जरूरत के नहीं है, उन्हें हमेशा रोका जा सकता है ।

05. महिला सुरक्षा

      जिस देश में देवीयों की पूजा सबसे अधिक होती है, उसी देश में हर रोज़ सैकड़ों रेप के केस दर्ज होते हैं। इसके अलावा छेड़छाड़, विवाहोप्रांत दहेज, प्रताड़ना और जान से मारना आदि को ज़रा भी गंभीरता से नहीं लिया जाता । यही कारण है कि महिला सुरक्षा कभी भी चुनावों का गंभीर मुद्दा नहीं बना। लॉकडाउन के समय इन आंकड़ों ने आसमान छुआ है, जोकि बड़ी चिंता का विषय है। हालांकि सरकारी तौर पर महिलाओं की सुरक्षा के लिए कई कानून हैं, किंतु यह सरकार से अधिक सामाजिक स्तर की कोशिशों से ही कम किया जा सकता है।

06. आतंकवाद

      दुनिया भर में फैले आतंकवाद ने जहाँ पूरी दुनिया की नाक में दम कर रखा है, वहीं भारत में पाकिस्तान से प्रसारित आतंकवाद से लड़ना आज भी एक पहाड़ के समान चुनौती है । हालांकि पिछले कुछ सालों में मोदी सरकार के आक्रमक नेतृत्व में आतंकवादी गतिविधियां बेहद कम हुई हैं, या यूं कहा जाए कि वे कश्मीर को पार नहीं कर पाई हैं । लेकिन हर साल की तरह ही आंतकवाद एक नई शक्ल में सामने आएगा और इसीलिए सरकार की आक्रमक एवं सकारात्मक नीतियां जैसे धारा 370 हटाना, चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ़ का पद लाना, पाकिस्तान के भीतर घुस कर आतंकवादियों का सफाया करना आदि कारगर साबित होती आई हैं ।

      धारा 370 हटने के बाद से अबतक 2020 की शुरुआत हो चुकी है, लेकिन ऐसा नहीं है कि कश्मीर मसला पूरी तरह सुलझ गया है । वहां से खबरें पूरी तरह निकल कर बाहर नहीं आ पा रही हैं और इंटरनेट सेवा बहाल नहीं हो पाई है । पाकिस्तान इसे मानवधिकार का मामला बनाने की पूरी कोशिश कर रहा है, जबकि असल में वह भारत में हिंसा फैलाना चाहता है । इस स्थिति से मोदी सरकार 2020 में कैसे निपटती है, यह देखना रोचक होगा, क्योंकि एक बार इंटरनेट सेवा पूरी तरह बहाल हो जाए, फिर पूरा सच और अफवाहें दोनों एक साथ मिलकर लोगों को प्रभावित करेंगी, जोकि वैश्विक स्तर की होंगी ।

07. विदेश नीति का विस्तार करना

      आमतौर पर देश की जनता केवल दिखावे वाली राजनीति पर अधिक खुश होती है, लेकिन विदेश नीति में देशों के संबंध नेताओं के दिखावे बहुत कुछ दर्शाते हैं । इसी कारण से पिछले कुल सालों में भारत ने उन देशों के साथ अपने संबंध बेहतर किए हैं, जिनसे दुनिया के सामने हम मिलने में भी कतराते थे । हांलांकि अभी भी इसमें कई पेंच हैं और तुर्की, मलेशिया, चीन और यूरोप के कई देश ऐसे भी हैं, जो अक्सर मौका मिलने पर भारत से संबंध बिगाड़ने में देर नहीं लगाते । लेकिन चीन के साथ अब नई विदेश नीति की पटकथा लिखनी होगी, साथ ही मित्र देशों के साथ किस प्रकार संबंध और प्रगाड़ किए जाए यह भी टेढ़ी खीर होगी, क्योंकि नेपाल ने चीन का संरक्षण पाते ही भारत को आँखें दिखाना शुरू कर दिया है । इनसे पार पाना कई समस्याओं को हल करने में बहुत सहायता करेगा ।

08. एन.आर.सी., यूनिफॉर्म सिविल कोड आदि बिलों को पास करवाना

नागरिकता कानून पास करवाते समय देश के गृह मंत्री अमित शाह ने काफी जोश में कहा था कि वे किसी भी हाल में एनआरसी को लागू करवाकर ही रहेंगे । लेकिन नागरिकता कानून पास होने के बाद से अब तक बहुत बार देश के कई हिस्सों में इसका बहुत विरोध भी हुआ है । जिसके बाद अन्य विवादास्पद कानूनों को पास करवाने के लिए सरकार को एड़ी चोटी का जोर लगाना होगा, और साथ ही देश के माहौल को भी बिगड़ने से रोकना टेढ़ी खीर होगा । क्योंकि पूरा विपक्ष यह जानता है कि आतंकवादियों को तो गोली मारी जा सकती है, लेकिन अपने ही नागरिकों पर डंडे बरसाना भी हर सरकार के लिए विश्वव्यापी निंदनीय होता है ।

09. नौकरशाही और भ्रष्टाचार

      चाहे सरकार कितनी भी अच्छी नीतियां बना ले, लेकिन यदि उसे लागू करने के लिए नौकरशाही तंत्र सुस्त और नाखुश हो तो सरकार अपने मकसद को पूरा करने में सक्षम नहीं हो पाएगी । और इसी के साथ जुड़ा मुद्दा भ्रष्टाचार भी है । इस साल भी केंद्र एवं राज्य के कर्मियों से बिना भ्रष्टाचार के अपने नीतियों को लागू करवाना हमेशा की ही तरह सरकार के लिए आफत होगी ।

10. अच्छी शिक्षा और सेहत

कोई भी सरकार हमेशा से ही इन दो क्षेत्रों पर अधिक तवज्जों देती नज़र नहीं आई है। लेकिन अच्छी शिक्षा न हो तो देश के युवा पीढ़ी अर्थव्यवस्था में बड़ा योगदान नहीं दे पाएगी । साथ ही सेहत के विभाग को भी इस साल कई गुना चौकसी बरतने की आवश्यकता है क्योंकि कोरोना वायरस से जितने लोग बिमार या मरे नहीं, उससे कई हज़ार गुना उन्हें वित्तीय नुकसान भी हो गया। इन नुकसानों की भरपाई करने से अच्छा है कि सरकार इनसे लड़ने व रोकने की शक्ति अर्जित करे। यह भी सत्य है कि बिना उच्च स्तर की शिक्षा के बिना आत्मनिर्भर अभियान जैसे महाअभियानों का बेड़ा पार नहीं लगाया जा सकता है।